श्रीमद्भगवद्गीता हिंसक युद्ध नहीं बल्कि मनोविज्ञान का अद्वितीय शास्त्र है: बीके मंजू

शिव अनुराग भवन राजकिशोरनगर में श्रीमद्भगवद्गीता की राह वाह जिन्दगी वाह का शुभारम्भ

बिलासपुरः जैसे आम के स्वाद का वर्णन सुनकर उसके स्वाद का अनुभव नहीं कर सकते । इसके लिये आपको उस आम का सेवन कर स्वयं अनुभव करना होता है, इसी प्रकार परमात्मा के प्यार का अनुभव करने से ही उनके द्वारा दिये ज्ञान एवं प्यार की स्मृति आपके दिल में ऐसे बस जायेगी फिर चाहे कोई कितना भी शकुनि बनकर भटकाने की कोशिश करे आप परमात्मा का दर छोड़ नहीं पाएंगे।

यह बातें ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने शिव अनुराग भवन राजकिशोरनगर में *” श्रीमद्भगवद्गीता की राह- वाह जिन्दगी वाह”* के उद्घाटन सत्र में कही। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता ऊपरी तौर पर युद्धशास्त्र दिखाई पड़ता है पर वास्तव में यह मनोविज्ञान का अद्वितीय शास्त्र है। गहराई से अध्ययन करने पर इसमे स्वयं के अंदर के, सामाजिक, वैश्विक, पारिवारिक समस्याओं का समाधान मिलता है।

आगे कहा कि इसके सातवें अध्याय का चिंतन पितृपक्ष में विशेष रूप से किया जाता है।शास्त्रों में वर्णित कौरव-पांडव के नाम गुणवाचक है। युद्ध में स्थिरबुद्धि को युधिष्ठिर, ज्ञान अर्जन करने वालों को अर्जुन, शक्तिशाली इच्छाशक्ति वालों को भीम, समदृष्टि रखने वालों को नकुल, श्रेष्ठ कार्यों में सहयोगी को सहदेव एवं बुरे कर्म करने वालों के नाम *दु* अक्षर से प्रारंभ कौरव के रूप माँ दर्शाया गया है। वास्तव में युद्ध अथवा विनाश की परिस्थिति मे पांडव ईश्वर के प्रति प्रीतबुद्धि एवं कौरव विपरीत बुद्धि के प्रतीक हैं।

मंजू दीदी ने बताया कि आगे हर अध्याय के मुख्य श्लोकों पर परमात्मा द्वारा प्राप्त ज्ञान के आधार पर विस्तार से चिंतन किया जायेगा। बड़ी संख्या में उपस्थित जिज्ञासुओं से बीके मंजू दीदी ने निवेदन किया कि आप चाहे जितनी संख्या में और मित्र संबंधी को ले आएं परमात्मा के घर में सबके लिये व्यवस्था है।

हमारा उद्देश्य सबको को सुख शांति का रास्ता बताना है।
आगे हर अध्याय के मुख्य श्लोकों पर परमात्मा द्वारा प्राप्त ज्ञान के आधार पर विस्तार से चिंतन किया जायेगा। बड़ी संख्या में उपस्थित जिज्ञासुओं से बीके मंजू ने निवेदन किया कि आप चाहे जितनी संख्या में और मित्र संबंधी को ले आएं परमात्मा के घर में सबके लिये व्यवस्था है। हमारा उद्देश्य सबको सुख शांति का रास्ता बताना है

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