
संवाददाता:बसंत राघव

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने ग्राम खैरा (लवन), जिला बलौदा बाजार में कोटवार की नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितता पाते हुए संतोष दास की नियुक्ति को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने नियुक्ति प्राधिकारी को कड़े निर्देश दिए हैं कि छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 230 के नियम 4 (जो प्रक्रिया निर्धारित करता है) का अक्षरशः पालन करते हुए नया विज्ञापन जारी किया जाए।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि आदेश की प्रति मिलने के तीन माह के भीतर नई चयन प्रक्रिया पूरी की जाए। इस आदेश के साथ ही याचिकाकर्ता संतोष दास के पक्ष में पूर्व में दी गई अंतरिम राहत भी समाप्त हो गई है।
मामला क्या था?
ग्राम खैरा (लवन) के तत्कालीन कोटवार पुनीदास के निधन के बाद उनके पुत्र संतोष दास ने कोटवार पद पर नियुक्ति हेतु आवेदन प्रस्तुत किया था। इस नियुक्ति को चुनौती मिलने पर उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि कोटवार पद पर नियुक्ति के लिए ग्राम पंचायत से प्रस्ताव मंगाना अनिवार्य कानूनी प्रक्रिया है। बिना ग्राम पंचायत के प्रस्ताव के तहसीलदार द्वारा सीधे की गई नियुक्ति को नियमविरुद्ध माना गया है।
मामला क्या है?
शुरुआती आदेश: पूर्व कोटवार पुनी दास की मृत्यु के बाद तहसीलदार ने मोगरूदास के दावे की अनदेखी कर दी। तहसीलदार ने ग्राम पंचायत से बिना किसी प्रस्ताव या अनुशंसा के संतोष दास को युवा होने के आधार पर नया कोटवार नियुक्त कर दिया।
लंबी कानूनी लड़ाई: तहसीलदार के इस आदेश के खिलाफ मोगरूदास ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के पास अपील की। एसडीओ ने तहसीलदार के आदेश को अवैध पाकर रद्द कर दिया। इसके बाद संतोष दास ने क्रमशः कमिश्नर रायपुर, छत्तीसगढ़ राजस्व मंडल और अंततः छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (रिट याचिका) का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट का अंतिम फैसला
उच्च न्यायालय ने पूर्व के सभी अपीलीय आदेशों को सही ठहराते हुए संतोष दास की याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया।
न्यायालय ने मोगरूदास को भी इस पद के लिए अपात्र (अविचारणीय) घोषित किया, क्योंकि वह अब सेवानिवृत्ति की आयु पूरी कर चुका है।
कानून और न्याय दृष्टांत
मोगरूदास की ओर से मामले की पैरवी अधिवक्ता राजेश केशरवानी और अधिवक्ता देवधर महंत ने की। अधिवक्ताओं ने कोर्ट के सामने दो महत्वपूर्ण न्याय दृष्टांत (साइटेशन) पेश किए:
लक्ष्मीबाई विरुद्ध छत्तीसगढ़ राज्य एवं अन्य प्रहलाद यादव विरुद्ध छत्तीसगढ़ राज्य एवं अन्य इन दोनों ही मामलों में न्यायालय द्वारा यह विधिक सिद्धांत स्थापित किया गया है जिसमें कोटवार नियुक्ति हेतु ग्राम पंचायत प्रस्ताव मंगाया जाना आवश्यक प्रतिपादित किया गया है।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ भू- राजस्व संहिता 1959 की धारा 230 के
अंतर्गत बनाए गए नियम 4(1) में कोटवार नियुक्ति हेतु ग्राम पंचायत प्रस्ताव मंगाया जाना प्रावधानित है। वहीं नियम 4 (2) में उल्लेखित है कि कोटवार पद के प्रत्याशियों की , अन्य बातें समान होने पर निवृत कोटवार के संबंधियों को अधिमान्यता दी जा सकती है। किंतु टिप्पणी में यह भी प्रावधानित है कि यदि रिक्ति , पूर्व पदधारी के दुश्चरित्र, अवचार या अवज्ञा के कारण निलंबन या पदच्युति द्वारा हुई हो , ऐसी दशा में पूर्व पदधारी के संबंधियों की नियुक्ति नहीं की जा सकेगी।