
छात्रों के पास न सिर्फ डिग्री हो बल्कि प्राचीन भारतीय ज्ञान विज्ञान परंपरा के साथ आधुनिक ज्ञान से परिपूर्ण हो – कुलपति बंश गोपाल सिंह
पंडित सुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन को लेकर दो दिवसीय कार्यशाला का किया जा रहा आयोजन
बिलासपुर
पंडित सुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन को लेकर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ आज विश्वविद्यालय के सिरपुर प्रशासनिक भवन में किया गया। आयोजन के मुख्य अभ्यागत के रूप में विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. बंश गोपाल सिंह शामिल हुए, वहीं संस्था के कुलसचिव भुवन सिंह राज भी उपस्थित रहे। आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन केंद्र द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के प्रथम दिन दक्षिण छत्तीसगढ़ के रायपुर, दुर्ग, कांकेर, जगदलपुर क्षेत्रीय केंद्रों के अंतर्गत आने वाले अध्ययन केंद्रों के करीब 77 अधिकारी, कर्मचारी शामिल हुए। वही आयोजन के द्वितीय दिन यानी शुक्रवार को उत्तर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, अंबिकापुर, जशपुर क्षेत्रीय केंद्रों के अंतर्गत आने वाले अध्ययन केंद्रों के करीब 70 अधिकारी-कर्मचारी शामिल होंगे।
उद्घाटन समारोह उपरांत कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए आयोजन के मुख्य अभ्यागत पंडित सुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. बंश गोपाल सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का क्रियान्वयन चुनौती पूर्ण है विशेष रूप से ओपन यूनिवर्सिटी के लिए । क्योंकि हमें कोर्स स्ट्रक्चर के साथ-साथ एसएलएम अर्थात् पाठ्य सामग्री – किताबें भी तैयार करनी होती हैं।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के निर्देशानुसार हमारे विश्वविद्यालय में जो कोर्स स्ट्रक्चर तैयार किए गए है उसके तहत एक विद्यार्थी को पाठ्यक्रम चयन करने के लिए विस्तृत विकल्प मिलेंगे। उनके अंदर स्किल डेवलपमेंट के कोर्सों के माध्यम से कौशल विकास किया जाएगा। क्षमता संवर्धन व भाषिक क्षमता पाठ्यक्रम के माध्यम से निपुण किया जाएगा। वैल्यू एडेड पाठ्यक्रमों के माध्यम से भारतीय संस्कृति और प्राच्य भारतीय वैज्ञानिकता से परिचित कराया जाएगा ताकि जब विश्वविद्यालय से वे डिग्री लेकर निकले तो उनके अंदर न सिर्फ कौशल हो बल्कि प्राचीन भारतीय ज्ञान विज्ञान परंपरा के साथ-साथ आधुनिक ज्ञान विज्ञान भी हो। इस तरह से वह ऐसे संपूर्ण नागरिक के तौर पर बाहर आए जो देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।
विश्वविद्यालय के कुल सचिव श्री भुवन सिंह राज ने कार्यशाला में उपस्थित आधिकारिक कर्मचारियों को उद्बोधित करते हुए कहा कि आयोजित कार्यशाला का मूल उद्देश्य प्रवेशित शिक्षार्थियों को ज्यादा से ज्यादा सुविधा देने के लिए तैयार रहना है। प्रवेश के दौरान छात्रों के सामने कौन-कौन सी समस्याएं आती है और उसका त्वरित निदान कैसे करना है.. इस संदर्भ में कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।
आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन केंद्र (CIQA) के निदेशक प्रोफेसर शोभित बाजपेयी ने कहा कि आज प्रशिक्षण सत्र विश्वविद्यालय के विभिन्न अध्ययन केंद्रों में संलग्न हमारे समन्वयकों, सहायक समन्वयकों व कर्मचारियों के लिए है। वस्तुतः विश्वविद्यालय में एनईपी लागू करने का जो महती कार्य है वह अध्ययन केंद्रों में पदस्थ लोगों के द्वारा ही किया जाना है। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों कर्मचारियों को विश्वविद्यालय द्वारा अपनाए गए कोर्स स्ट्रक्चर की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया गया कि एक छात्र जो फर्स्ट सेमेस्टर में प्रवेश के लिए आएगा उसे अपने कोर्स का चयन किस प्रकार से कर करना है, वह किन कोर्सों का चयन कर सकता है। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय, संबंधित क्षेत्रीय व अध्ययन केंद्रों के अधिकारी कर्मचारी शामिल हुए।
जिज्ञासाओं को किया गया दूर
कार्यशाला के दौरान विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रवेश के समय छात्रों को आने वाली समस्याओं व उसके निदान के संदर्भ में विस्तृत जानकारी दी जा रही थी। इसके अलावा अगर किसी अधिकारी कर्मचारी को विषय के संदर्भ में कोई संशय हो इसे दूर करने के लिए 1 घंटे की प्रश्नोत्तरी का भी आयोजन किया गया था जिसमें बड़ी संख्या में प्रश्न पूछे गए एवं विषय से संबंधित सुझाव भी दिए गए।