
कान्यकुब्ज साहित्य परिषद् रायपुर द्वारा आशीर्वाद भवन में सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया इस आयोजन के संयोजक श्री अजय किरण अवस्थी ने बताया कि कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज छत्तीसगढ़ के संयोजन में यह आयोजन किया गया जिसने अध्यक्ष अरुण शुक्ला एवं सचिव सुरेश मिश्रा का सराहनीय योगदान रहा ।
मुख्य अतिथि की आसंदी से छत्तीसगढ़ की वयोवृद्ध वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती शिवा बाजपेयी जी थी तथा विशिष्ट अतिथि सचिव श्री सुरेश मिश्रा जी कान्यकुब्ज समाज छत्तीसगढ़,व अध्यक्ष वरिष्ठ समाजसेवी प्रकाश अवस्थी जी थे।
कार्यक्रम में राजधानी व प्रदेश स्तरीय कवियों की सहभागिता ने वातावरण को सरस बना दिया।
मां शारदे की वंदना श्रीमती ममता त्रिवेदी “सुरधुनि”व रंजु त्रिवेदी द्वारा किया गया।
अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कवि गोष्ठी का प्रारम्भ किया गया । अतिथियो का स्वागत शशि मिश्रा , वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती प्रीति मिश्रा जी,श्री देवेन्द्र पाठक जी एवं श्रीमती शुभा शुक्ला जी द्वारा किया गया। स्वागत भाषण कार्यक्रम के संयोजक अजय किरण अवस्थी जी ने दिया व उद्घाटन उद्बबोधन सुरेश मिश्रा जी सचिव द्वारा दिया गया। मुख्य अतिथि श्रीमती शिवा बाजपेयी “शिवानीजी”ने अतिथि उद्बबोधन में कविताओं के माध्यम से आशीर्वचन देकर प्रेरणा प्रदान किया।
काव्य पाठ का प्रारंभ कविताओं से हुआ
जिसमें सर्वप्रथम कान्यकुब्ज समाज के हेमंत तिवारी ने –
“मैं आने वाले कल के बारे में सोच रहा था पीछे मुड़के देख रहा था तो बीता हुआ कल हंस रहा है।” अपनी पंक्तियां पढ़ीं तत्पश्चात
ममता त्रिवेदी जी ने पावस ऋतु पर रचना पढ़ी –
*“ऋतुहै पावस लगे अमावस”बूंदों की बौछार मारे हैं कटार।”*
रामगोपाल शुक्ला जी की दार्शनिक पंक्तियां
*निश्छल हृदय हूं कविता का घर है कविता हमारी आत्मा पर परमात्मा की दस्तक है।* सुनाई
सुरेन्द्र अग्निहोत्री जी”आगी”ने मां पर मार्मिक रचना पढ़ी
*“वो सारी रात जागी थी मगर तुझको सुलाया था'”*
शुभा शुक्ला जी”निशा”ने सावन पर रचना पढ़ी
*“चलों सखि झूला झूलेंगे आंगनमे,*
*आओ सखि कजरी गाएंगे आंगन में।”*
निश्चय बाजपेयी जी ने गीत पर उद्गार व्यक्त किया
*गीतकारी वो जो बेचैन मन कै धीर दे*
*अपनी पे उतर आए तो सीना चीर दे”।*
श्रद्धा पाठक”स्वस्ति”द्वारा सावन पर
*चम चम चमके चंचला चहुं दिशा चहुं ओर,चमक झमक चांदनी चमकाती हैं भोर* पढी गयी।
सोनाली अवस्थी जीने
*“जो अनादि है अनंत हैजिसका कभी न अंत है ब्रह्मांड में गुंजित सदा वह ओम का संगीत है* पढ़ा।
आयुष पांडे द्वारा *मंजिल की तलाश में मुश्किलों को भेदनाहै, कण-कणमें बसी जीवन की छोटी सी वेदना है।* पढी गयी ।
प्रीति रानी तिवारी ने तिरंगे पर रचना पढ़ी *घर-घर में तिरंगा हो जब प्राण मेरे निकले मेरे तन में तिरंगा हो।*
सुमन शर्मा बाजपेई द्वारा *पानी बरसे जोर से प्यासी रह गई आप दुख की गहरी खाई में डूब गया विश्वास।* पढ़ी गई।
अध्यक्षीय उद्बोधन प्रकाश अवस्थी जी ने व्यक्त किया और कहा कि साहित्य को समाज से जोड़े रखने की आज सबसे ज्यादा जरूरत है ।
कार्यक्रम का सफल काव्य मय संचालन सुमन शर्मा बाजपेयी व शुभा शुक्ला” निशा”द्वारा किया गया। मुख्य अतिथि श्रीमती शशि बाजपेयी जी व श्री डीके बाजपेयी जी का सम्मान शाल श्रीफल भेंट कर कार्यकारिणी सदस्य श्री के पी दीक्षित व अर्चना त्रिवेदी सहित आयोजक मंडल द्वारा किया गया एवं
आभार अजय किरण अवस्थी ने किया।
इस अवसर पर समाज के सदस्य अनिल शुक्ला, चंद्रिकाशंकर बाजपेई,विजय शुक्ला,विमल शुक्ला,आशुतोष पांडे,रंजू त्रिवेदी,प्रीति मिश्रा, शशि पांडे, सरिता त्रिवेदी,माधुरी शुक्ला,सरोजनी बाजपेई,जयंत मिश्रा,शशि मिश्रा, जे पी मिश्रा,बद्री मिश्रा,प्रीति रानी तिवारी सहित बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित थे ।
