एटीआर- जहां पहचान कीलिखी जा रहीं,कहानी

एटीआर- जहां पहचान की
लिखी जा रहीं,कहानी.!
किसी भी टाइगर रिजर्व को उसकी खास विशेषता के लिए पहचाना जाता है। छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व(ATR) मुंगेली में अब दस टाइगर है यह कैमरा ट्रेप में पुष्टि हो गयी है। दो शावक भी बताये जाता है। लेकिन उनकी दूरी जिप्सी सफारी रुट से बनी है,ये नजदीकियां कैसे बने यह प्रयास जरूरी है। जिन दो सम्भवनाओं पर लिखने जा रहा हूँ वह पार्क में हींग लगे ना फ़िटकरी रंग चौखा की बात है।
1,गर्मी के दिनों कैमरा ट्रेप में यहां के ब्लैक पेंथर की उसकी में फोटो आयी है। पेंथर जब जोड़े में होते हैं जब सन्तान के लिये मिलन-काल होता है। इसलिए सम्भवना है कि,इनके शावक जन्म गए होंगे। इनमें कितने काले शावक हैं वह एटीआर की पहचान बनेंगे। बारिश बाद जब जंगल सघन से विरल होगा,तब मां के साथ अपने इलाके में दिखाई देंगे । इसके लिए एटीआर के संभावित इलाके मेँ कैमरा ट्रेप और मैदानी स्टाफ़ की गतिविधियां बढ़ानी होगीं। यह कुल महफूज रहे यह सतत प्रयास जरूरी होगा।
2, इन दिनों एटीआर में जंगली हाथी और सिहावल कैम्प के पालतू हाथी का याराने के सिलसिले के शुरुवात है। यह क्या गुल खिलाती है, फिलहाल कहा नहीं जा सकता। पांच जंगली हाथियों का दल सिहावल कैम्प पहुंच जाता है। जिसे कैम्प में उपस्थितों ने देखा है।
सिहावल एलिफेंट कैप में प्रशिक्षित हाथी राजू हथिनी लाली, वयस्क हो रहा बादल और एक शावक कुल मिलाकर चार हाथी हैं।
यहां पहुंचने वाले पांच हाथी का दल है। जिनमे दो नर और तीन मादा सम्भावित है। पहले यह दल इर्द गिर्द रहता था पर अब पालतू हाथियों के संग मिलने पहुंचा है। सम्भवत: इनमें मादा तो है पर राजू जैसा मस्त नर नहीं, जिस वजह बात बनती नजर आ रही है। जंगली हाथी के दल में प्रजनन योग्य नर की कमी है। यह जंगली हाथी लगातार शाम से रात तक तीन बार बेखौफ आ चुके हैं।
आम तौर पालतू हाथी जंगली हाथी से दूर परस्पर बनाते रहते हैं। लेकिन अब अध्ययन में आया है, अपवाद स्वरूप प्रजनन के लिए मिलन या सुरक्षा जैसे कारण से जंगली हाथी पालतू के संग भी रह सकते हैं। अब आगे आगे देखिए यहां होता है क्या..!!
-वन्य जीव सप्ताह की
समापन क़िस्त।।

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