
आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री साहू ने केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव से भेंट की और छत्तीसगढ़ राज्य के प्रसिद्ध गिधवा-पारसदा आर्द्रभूमि को संरक्षित आर्द्रभूमि, वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र एवं इको-पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व और ‘पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास’ के विजन के अनुरूप है, जिसके माध्यम से भारत आज वैश्विक स्तर पर जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास का अग्रणी देश बनकर उभरा है।
श्री साहू ने इस अवसर पर बताया कि गिधवा-पारसदा आर्द्रभूमि प्रवासी पक्षियों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना है, जहां हाल के वर्षों में संरक्षण संबंधी कई पहलें—जैसे प्रारंभिक सर्वेक्षण, पक्षी गणना, जल संरक्षण कार्य और स्थानीय समुदाय की भागीदारी—सफलतापूर्वक जारी हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रस्तावित पहल से न केवल प्रवासी पक्षियों के संरक्षण को बल मिलेगा, बल्कि जलवायु अनुकूलन प्रयासों, स्थानीय आजीविका, ग्रामीण विकास, पर्यावरण शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी सुदृढ़ता प्राप्त होगी।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस परियोजना के कार्यान्वयन से छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित होगा।
इस पर केंद्रीय मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने सकारात्मक और सक्रिय प्रतिक्रिया देते हुए प्रस्ताव पर संज्ञान लिया और संबंधित मंत्रालय के अधिकारियों के साथ कल एक समीक्षा बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया, ताकि प्रस्ताव के क्रियान्वयन की संभावनाओं पर विस्तार से विचार किया जा सके।