माँ का नि:स्वार्थ प्रेम और त्याग ही समाज की असली शक्ति है – बीके स्वाति दीदी

बिलासपुर।
एक माँ केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि गुणों की पाठशाला है। दुनिया में अगर कोई प्रेम नि:स्वार्थ और ईश्वरीय प्रेम के सबसे करीब है, तो वह माँ का प्रेम है। माँ बच्चे की पहली गुरु होती है, जो उसे न केवल बोलना सिखाती है, बल्कि जीवन जीने के संस्कार भी देती है।
उक्त वक्तवत प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की मुख्य शाखा, टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन की संचालिका बीके स्वाति नक्षत्र दीदी ने अंतरराष्ट्रीय मदर्स डे के उपलक्ष्य में कहीं। दीदी ने आगे कहा कि आज के आधुनिक युग में जहाँ मानवीय संवेदनाएं कम हो रही हैं, वहाँ माँ का धैर्य और उसकी सहनशीलता ही परिवार को जोड़कर रखने का सूत्र है। माँ केवल जन्म देने वाली ही नहीं, बल्कि अपने संकल्पों से बच्चे के भाग्य का निर्माण करने वाली शक्ति है।
बीके स्वाति दीदी ने कहा कि माँ केवल जन्म देने वाली ही नहीं, बल्कि परमात्मा हमारी सबसे बड़ी माँ है, जो हमें ईश्वरीय ज्ञान द्वारा हमारे आत्मिक स्वरूप को निखारते हैं। प्रकृति हमारी माँ है। प्रकृति हमारा पालन-पोषण करती है और धरती माँ हमें सब कुछ सहते हुए भी जीवन जीने का आधार प्रदान करती है। इसी प्रकार हमारा देश भी हमारी माँ है, जिसकी अस्मिता और रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है। इन सभी ‘माताओं’ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना ही सच्चे अर्थों में मातृ दिवस मनाना है।
बीके स्वाति दीदी ने कहा कि वर्तमान समय, आज की माताओं पर दोहरी जिम्मेदारी है। उन्हें घर और बाहर के सामंजस्य के साथ-साथ बच्चों को आध्यात्मिक बल भी प्रदान करना है। जब एक माँ स्वयं को राजयोग और ईश्वरीय ज्ञान से सशक्त बनाती है, तो उसका प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है। एक शांत और खुशहाल माँ ही एक स्वस्थ समाज की नींव रख सकती है। राजयोग के अभ्यास से माताओं में वह आंतरिक शक्ति जागृत होती है जिससे वे कठिन परिस्थितियों में भी विचलित नहीं होतीं।
बीके स्वाति दीदी ने कहा माताओं का केवल एक दिन नहीं, बल्कि हर दिन सम्मान करें। असली मदर्स डे तब है जब हम अपनी माँ की आज्ञा का पालन करें और उन्हें मानसिक शांति का उपहार दें। वृद्धाश्रमों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि जिस घर में माता-पिता का अपमान होता है, वहाँ कभी बरकत और सुख-शांति नहीं रह सकती।

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