माँ की डांट में भी छिपा होता है प्यार – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

ब्रह्माकुमारीज़ के ‘उड़ान’ शिविर में उमड़ा ममता का सैलाब

बच्चों ने मातृ वंदना के साथ शुभकामना कार्ड देकर माताओं का जीता दिल

बिलासपुर। ब्रह्माकुमारीज़, प्रभु दर्शन भवन, टिकरापारा में चल रहे सात दिवसीय ‘बाल संस्कार शिविर: उड़ान’ में रविवार को मातृ दिवस अत्यंत भावपूर्ण वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम में बच्चों ने अपनी माताओं के प्रति प्रेम, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर उपस्थित माताओं का स्वागत व मंच संचालन करते हुए ब्रह्माकुमारी गायत्री बहन ने कहा कि संसार में माँ का स्थान सर्वोच्च है। भगवान भले प्रत्यक्ष दिखाई न दें, लेकिन माँ भगवान का साक्षात स्वरूप होती है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष की थीम “माँ सुखी परिवार की आधारशिला है” समाज को परिवारों में संस्कार और प्रेम का महत्व समझाने वाली है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि एक माँ ही बच्चे को संस्कारित कर उसके जीवन को श्रेष्ठ दिशा देती है। यदि माँ कभी डांटती भी है, तो उसमें बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की चिंता और गहरा प्यार छिपा होता है। उन्होंने कहा कि माँ केवल जन्म देने वाली ही नहीं, बल्कि सही मार्ग दिखाने वाली और आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाली “आध्यात्मिक माँ” भी होती है।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने मनमोहक प्रस्तुतियाँ देकर सभी को भावुक कर दिया। कुमारी तृषा एवं अनन्या स्वागत गीत पर नृत्य व कुमारी तृप्सा ने “मेरी माँ” जैसे गीतों पर सुंदर नृत्य प्रस्तुत किया, वहीं छोटी उम्र के आयांश विश्वकर्मा ने पियानो वादन से सभी का मन मोह लिया।

शिविर में बच्चों द्वारा स्वयं तैयार किए गए आकर्षक ग्रीटिंग कार्ड्स भी माताओं को भेंट किए गए। बच्चों ने मंच पर अपनी माताओं के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लिया, जिससे वातावरण भावनाओं से भर उठा।

मंजू दीदी ने बच्चों को प्रेरित किया कि वे अपनी माँ की सेवा करें और उनके त्याग का सम्मान करें। उन्होंने कहा कि माँ के लिए सबसे बड़ा उपहार यह होगा कि बच्चे अपने जीवन में गलत आदतों और गलतियों से दूर रहने का संकल्प लें तथा श्रेष्ठ संस्कार अपनाएँ। उन्होंने बच्चों से प्रतिदिन अपनी माँ के पैर दबाकर उनका सम्मान करने और उनकी थकान दूर करने का भी संदेश दिया।

कार्यक्रम के अंत में आगामी गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया गया कि शिविर का समापन 12 मई को होगा, जिसमें बच्चों को ई-सर्टिफिकेट एवं उपहार प्रदान किए जाएंगे। साथ ही 1 जून से नियमित आसन-प्राणायाम सत्र तथा 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

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