कलेक्टर का लेटर, DEO का जवाब – पर 10वीं की गीतिका की फीस अब भी जस की तस

‘योजना नहीं है’ कहकर लौटा दिया, जबड़ा टूटे बाप के 3 बच्चों का भविष्य अधर में

बिलासपुर/गनियारी, 10 जुलाई 2026। सड़क हादसे में जबड़ा 8 टुकड़े, आंख पर 12 टांके और पैर की हड्डी बाहर निकले पति किशन लाल देवांगन को बचाने के लिए चित्रलेखा देवांगन ने 5 लाख कर्ज लिया। आज पति अपाहिज हैं, और 3 बच्चों की पढ़ाई पर तलवार लटक रही है।

कागजों की दौड़ पूरी, मदद शून्य:

  1. 15 जून 2026: चित्रलेखा ने कलेक्टर को आर्थिक मदद के लिए आवेदन दिया। साथ में पति के एक्सीडेंट की फोटो, आधार, राशन कार्ड लगाए।
  2. 19 जून 2026: कलेक्टर कार्यालय ने पत्र क्रमांक 3133 जारी कर जिला शिक्षा अधिकारी, बिलासपुर को “आवश्यक कार्यवाही” के निर्देश दिए।
  3. 8 जुलाई 2026: DEO कार्यालय ने पत्र क्रमांक 8486 में जवाब दिया – “आर्थिक सहायता राशि प्रदान किये जाने के संबंध में ऐसी कोई भी योजना इस कार्यालय में संचालित नहीं है। बच्चों को अपने निवास के समीप शासकीय विद्यालय में प्रवेश करावें।”

मतलब साफ है: कलेक्टर ने सुनवाई की, DEO तक कागज पहुंचा, DEO ने नियम का हवाला देकर हाथ खड़े कर दिए। न तो बकाया 20 हजार फीस का समाधान निकला, न इलाज-राशन के लिए एक रुपया मिला।

3 बच्चों पर संकट बरकरार:

  1. गीतिका देवांगन, 14 साल: 10वीं बोर्ड। डॉक्टर बनने का सपना। स्कूल का फीस ड्रेस नहीं देने के लिए!
  2. नूपुर देवांगन, 7 साल: द न्यू इंडिया स्कूल, दूसरी क्लास। स्कूल ड्रेस नहीं!
  3. युवराज देवांगन, 3 साल: बुखार में। दवाई तो दूर, प्ले स्कूल की 2 हजार फीस नहीं।

चित्रलेखा की पीड़ा: “कलेक्टर साहब का धन्यवाद कि उन्होंने 4 दिन में DEO को लेटर भेजा। DEO मैडम ने भी 8 जुलाई को जवाब दे दिया। कागज तो पूरा दौड़ गया साहब, पर मेरे बच्चों के हाथ में कॉपी नहीं पहुंची। सरकारी स्कूल में डाल भी दूं तो 10वीं की गीतिका का साल बर्बाद हो जाएगा। पुरानी फीस कौन भरेगा? पति की दवाई, घर का राशन, सूदखोर का कर्ज – इसका क्या? ‘योजना नहीं है’ सुनकर अब किसके दरवाजे जाऊं?”

अब सिर्फ जनता का सहारा: प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। कलेक्टर का आदेश गया, DEO का जवाब आ गया। नियम कहते हैं आर्थिक मदद नहीं मिल सकती। पर 3 बच्चों की जिंदगी नियम से बड़ी है।

बिलासपुर से अपील: “सरकार ने अपना काम कर दिया। अब आप लोग ही उम्मीद हो। जब तक गीतिका का फॉर्म नहीं भर जाता, जब तक नूपुर की किताब नहीं आती, तब तक आपके 100-500 रुपये ही हमारा सहारा हैं। आपके थोड़े सहयोग तीन जिंदगियां बचा लेंगे।”

तत्काल मदद के लिए संपर्क: 9406130259 – श्रीसूर्या पुष्पा फाउंडेशन

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