

25 अगस्त 2026। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित मुख्य सेवाकेंद्र राजयोग भवन, बिलासपुर में संस्था की पूर्व मुख्य प्रशासिका, परम आदरणीय राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि जी का 19वाँ स्मृति दिवस अत्यंत श्रद्धा, गरिमा एवं आध्यात्मिक भाव के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर मुख्य सेवाकेंद्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी स्वाति दीदी जी ने उपस्थित भाई-बहनों को संबोधित करते हुए दादी प्रकाशमणि जी के दिव्य व्यक्तित्व, उनकी सेवाओं तथा बिलासपुर के गौरवशाली आध्यात्मिक इतिहास को स्मरण किया।
बिलासपुर को मिला ऐतिहासिक गौरव
स्वाति दीदी जी ने एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य साझा करते हुए बताया कि बिलासपुर का राजयोग भवन समग्र छत्तीसगढ़ राज्य का प्रथम स्वनिर्मित ब्रह्माकुमारी सेवाकेंद्र होने का गौरव रखता है। इस ऐतिहासिक सेवाकेंद्र का शुभारंभ वर्ष 1988 में स्वयं आदरणीय दादी प्रकाशमणि जी के पावन कर-कमलों द्वारा हुआ था।
उन्होंने कहा कि पिछले लगभग चार दशकों से यह सेवाकेंद्र निरंतर आध्यात्मिक जागृति, नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना, राजयोग मेडिटेशन तथा सकारात्मक जीवनशैली के माध्यम से समाज में परिवर्तन की प्रेरणा दे रहा है। यह केंद्र आज भी बिलासपुर की आध्यात्मिक चेतना और मानव सेवा की परंपरा का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।
दादी प्रकाशमणि जी के व्यक्तित्व को स्मरण करते हुए स्वाति दीदी जी ने कहा कि दादी जी केवल एक कुशल प्रशासिका ही नहीं, बल्कि विश्वभर में लाखों लोगों को आध्यात्मिक जीवन की सही दिशा दिखाने वाली महान विभूति थीं। उनके भीतर अद्भुत नेतृत्व क्षमता के साथ-साथ असीम ममता, सहजता, नम्रता और आत्मिक प्रेम समाया हुआ था।
वे सदा अचल-अडोल रहकर आत्मविश्वास से परिपूर्ण रहती थीं। उनका संपूर्ण जीवन तपस्या, त्याग और सेवा की प्रेरणादायी मिसाल था। उनकी बुद्धि स्वच्छ आईने की तरह निर्मल और पारदर्शी थी। वे किसी के अवगुणों को मन में स्थान नहीं देती थीं और सहजता से उन्हें भूलकर सदैव शुभचिंतक बनी रहती थीं।
स्वाति दीदी ने कहा कि दादी प्रकाशमणि जी मातृत्व की साक्षात मूरत थीं। उनसे मिलने वाला प्रत्येक व्यक्ति उनके स्नेह और अपनत्व में स्वयं को परिवार का हिस्सा अनुभव करता था। वे इस बात का विशेष ध्यान रखती थीं कि उनके कारण अनजाने में भी किसी को कोई असुविधा या डिस्टर्बेंस न हो। वे सभी को संतुष्ट कर दुआएँ देती थीं और स्वयं भी सभी की दुआओं की पात्र बनती थीं।
उन्होंने कहा कि दादी जी के नेतृत्व में संस्था की सेवाओं का विस्तार विश्व के 130 से अधिक देशों तक हुआ, लेकिन इतनी विशाल उपलब्धियों के बावजूद उनका जीवन सदैव सरल, सहज, नम्र और ‘निमित्त भाव’ से परिपूर्ण रहा।
दादी प्रकाशमणि जी के 19वें स्मृति दिवस के उपलक्ष्य में देशभर में चलाए जा रहे “10 करोड़ नशा मुक्ति प्रतिज्ञा महा-अभियान” का भी उल्लेख करते हुए स्वाति दीदी जी ने कहा कि नशामुक्त समाज का निर्माण आज समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इस विशाल सामाजिक जागृति अभियान का शुभारंभ माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा वर्चुअल माध्यम से किया गया है।
इसके साथ ही मानवता की सेवा और जीवन रक्षा के संकल्प को साकार करने के लिए देश के विभिन्न स्थानों पर रक्तदान महादान शिविरों का आयोजन भी किया जा रहा है। दादी प्रकाशमणि जी की पावन स्मृतियों को नमन करते हुए राजयोग भवन में प्रातःकाल से ही भाई-बहनों द्वारा विशेष गहन योग साधना की गई। उपस्थित सभी भाई-बहनों ने दादी जी के प्रति श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनकी शिक्षाओं को जीवन में धारण करने और मानवता की सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने प्रसाद स्वीकार किया।