गणेश जी का स्वरूप हमें सिखाता है—बुद्धि, विवेक और एकाग्रता से हर परिस्थिति पर विजय पाई जा सकती है” — बी.के. स्वाति

14 सितम्बर 2026, बिलासपुर। गणेश चतुर्थी का पावन पर्व केवल श्री गणेश जी की पूजा-अर्चना का अवसर नहीं, बल्कि जीवन में ज्ञान, विवेक, धैर्य, शुभ संकल्प और विघ्नों पर विजय प्राप्त करने की प्रेरणा देने वाला आध्यात्मिक पर्व है। गणेश जी को भारतीय संस्कृति में प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता, बुद्धि एवं विवेक के देवता के रूप में स्मरण किया जाता है। उनके स्वरूप में जीवन को श्रेष्ठ बनाने के अनेक गहरे आध्यात्मिक रहस्य समाए हुए हैं।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय बिलासपुर की मुख्य शाखा, टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन की संचालिका ब्रह्माकुमारी स्वाति दीदी ने गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि गणेश जी का स्वरूप हमें सिखाता है कि जीवन के वास्तविक विघ्न बाहर की परिस्थितियां नहीं, बल्कि मन के अंदर उत्पन्न होने वाले भय, क्रोध, अहंकार, चिंता, अस्थिरता और नकारात्मक विचार हैं। जब मनुष्य अपने मन को सकारात्मक एवं शक्तिशाली बनाता है, तो विपरीत परिस्थितियां भी उसके लिए आगे बढ़ने का माध्यम बन जाती हैं।
उन्होंने कहा कि गणेश जी के बड़े कान हमें अधिक सुनने और कम बोलने की प्रेरणा देते हैं। जीवन में दूसरों की बात को धैर्यपूर्वक सुनना संबंधों में मधुरता लाता है। उनका बड़ा मस्तक विशाल सोच और ऊंचे विचारों का प्रतीक है। हमें छोटी-छोटी बातों में उलझने के बजाय विशाल दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
गणेश जी की छोटी आंखें एकाग्रता और सूक्ष्म दृष्टि का संदेश देती हैं। जीवन में लक्ष्य स्पष्ट हो और मन एकाग्र हो, तो सफलता की दिशा में आगे बढ़ना सरल हो जाता है। उनकी सूंड परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने की क्षमता का प्रतीक मानी जाती है। इससे हमें सीख मिलती है कि जीवन में लचीलापन रखें, लेकिन अपने मूल्यों और श्रेष्ठ सिद्धांतों से समझौता न करें।दीदी ने बताया कि गणेश जी का एक दंत यह संदेश देता है कि जीवन में आवश्यक बातों को स्वीकार करना और अनावश्यक बातों को छोड़ना सीखें। वहीं उनका मूषक वाहन इच्छाओं और चंचल मन पर नियंत्रण का प्रतीक माना जाता है। यदि इच्छाएं और मन हमारे नियंत्रण में हों, तो हमारी ऊर्जा सही दिशा में लग सकती है।
बीके स्वाति दीदी ने कहा कि राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानकर परमात्मा से सकारात्मक शक्तियां प्राप्त कर सकता है। आत्मिक जागृति से मन में शांति, पवित्रता, प्रेम, धैर्य, साहस और विवेक जैसे गुण विकसित होते हैं। यही आंतरिक शक्तियां जीवन के वास्तविक विघ्नों को दूर करने में सहायक बनती हैं।
गणेश चतुर्थी हमें यह संकल्प लेने की प्रेरणा देती है कि हम अपने जीवन से किसी एक कमजोरी को दूर करेंगे, किसी एक श्रेष्ठ गुण को अपनाएंगे और अपने विचारों को सकारात्मक बनाएंगे। जब एक व्यक्ति अपने मन को बदलता है, तो उसके परिवार, समाज और वातावरण में भी सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत होती है।
उन्होंने सभी नागरिकों को गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि गणेश जी के विघ्नहर्ता स्वरूप को केवल पूजन तक सीमित न रखते हुए उनके गुणों को अपने जीवन में धारण करना ही इस पर्व की सच्ची सार्थकता है। इस गणेश चतुर्थी पर हम अपने भीतर की नकारात्मकता पर विजय प्राप्त करने और शांत, पवित्र, शक्तिशाली एवं श्रेष्ठ समाज के निर्माण में योगदान देने का संकल्प ले!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *