छंदशाला का स्थापना दिवस आयोजन संबंधी बैठक और काव्य गोष्ठी संपन्न

छंदशाला की मासिक गोष्ठी सांई आनंदम उसलापुर में संपन्न हुई , जिसमें छंदशाला के कवि और कवियत्रियों ने एक से बढ़कर एक रचनाओं का पाठ किया । कार्यक्रम का सफल संचालन छंदशाला की संयोजिका डॉ सुनीता मिश्रा ने किया।
सर्वप्रथम बैठक की शुरुआत छंदशाला के स्थापना दिवस आयोजित करने संबंधी चर्चा से हुई। आपको बता दें कि वैश्विक आपदा काल में छंदशाला की स्थापना हुई थी और प्रतिवर्ष 24 मार्च को इसका स्थापना दिवस मनाया जाता है।प्रथम स्थापना दिवस सिद्ध आश्रम मेऊभाटा में , द्वितीय स्थापना दिवस रेशम अनुसंधान केन्द्र मेड्रापारा में,और तृतीय स्थापना दिवस यज्ञ शाला खैरा में मनाया गया है।आगामी 24 मार्च को छंदशाला का चतुर्थ स्थापना दिवस है उसे मनाने संबंधित चर्चा इस बैठक में की गई और होलिका दहन के कारण स्थापना दिवस 29मार्च को अर्धनारीश्वर धाम दूल्हा में मनाने का विचार सर्वसम्मति से किया गया। आयोजन संबंधी आवश्यक चर्चा के बाद काव्य गोष्ठी का दौर शुरू हुआ। जिसमें कवि अवधेश भारत ने तुम हमारी लाडली हो रहो सदा सुहागनी , कवि अमृत पाठक ने जो है भिखारी उनसे उपहार मांगते हो ,सतीश पांडेय उद्यान ने जैसे बसता है मोती सीपियों में,पी डी वैष्णव ने यादों में बचपन आता है ,मन को बहुत लुभाता है, शैलेंद्र गुप्ता ने त्रेता के सुख बैग लिए है अब द्वापर में जाना है ,विनय पाठक ने अंंबर झूमे मन इतराए ,हूप सिंह ठाकुर ने दीवारों से धूप उतरकर रोज फैलती आंगन में,सेवकरा साहू ने मुक्तक ,एम डी मानिकपुरी ने छत्तीसगढ़ी गीत ,सर्वेश पाठक ने दोहे लालच कभी न पालिये , वरिष्ठ कवि बुधराम यादव ने अगर चाहते उपर उड़ना निश्चित हो ध्यान, कवियत्री डॉ सुनीता मिश्रा ने पीड़ाओं में नैन बावरे क्यों खारा जल बरसाते हैं,वरिष्ठ कवि विजय तिवारी ने आम्र कुंज पर कोयल कूके मन भाये गीत गाकर काव्य रसधार बहाई ।
काव्य गोष्ठी के पश्चात वरिष्ठ कवि विजय तिवारी ने कविता लेखन में शब्द,भाव और शिल्प के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का सफ़ल संचालन छंदशाला की संयोजिका व कवयित्री डॉ सुनीता मिश्रा ने किया और आभार प्रदर्शन श्री शैलेन्द्र गुप्ता ने किया।

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