
बिलासपुर/छत्तीसगढ़ के सहकारिता, साहित्य, पुरुष की 42 वीं पुण्यतिथि विप्र साहित्य समिति के तत्वावधान में ,नगर के सांई आनंदम् परिसर में मनाई गई।
आयोजित इस कार्यक्रम में कवियों,साहित्यकारों ने विप्र जी के छायाचित्र पर माल्यार्पण,पूजन करते हुये समवेत स्वर में निरूपित किया कि स्व.द्वारिका प्रसाद तिवारी “विप्र” जी के समान निश्छलता और
साहित्य के प्रति वह अनुराग जो
असाहित्यिक और व्यवसायी को भी साहित्य में निपुण बना दे, ऐसे युग पुरुष को सादर नमन करते हैं।
उन्होंने अपने तात्कालिक प्रबुद्धजनों से अनुरोध कर भारतेन्दु साहित्य समिति की स्थापना 6 फरवरी 1935 को बिलासपुर में की। इससे नगर ,प्रदेश ही नहीं राष्ट्रीय स्तर पर भारतेंदु साहित्य समिति ने ख्याति अर्जित की। उस समय देश के समस्त प्रतिष्ठित कवि , साहित्यकारों ने बिलासपुर आकर भारतेंदु साहित्य समिति के कार्यकर्मो में अपनी सहभागिता भी निभाई।इनमें हरिवंशराय बच्चन, महीयसी महादेवी वर्मा,जयशंकर प्रसाद,राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर, छायावादी पं.मुकुटधर पांडेय, लोचनप्रसाद पांडेय,जैनेन्द्र कुमार जैन ,बुलाकी रॉय, प्रभुदयाल अग्निहोत्री जैसे हस्तियों ने बिलासपुर के मंच को सुशोभित किया।
इतना कुछ होते हुये भी विप्र जी ने सादगी के साथ अपने झोले में ही साहित्य की विविधता को समेटे आयुपर्यन्त चलते रहे।यह उद्गार विजय तिवारी जी ने व्यक्त किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता नवांकुर मयंकमणि दुबे , मुख्य अतिथि हूपसिंह ठाकुर तथा मंच संचालन हरबंश शुक्ल ने किया। इस गरिमामयी कार्यक्रम के द्वितीय चरण में पं. द्वारिका प्रसाद तिवारी विप्र जी को श्रद्धांजलि स्वरूप कवियों ने अपनी काव्यांजलि प्रस्तुत की ।
उपस्थित कवियों में सर्वश्री अमृतलाल पाठक,बुधराम यादव, रेखराम साहू, विनय पाठक, राजेन्द्र रुंगटा, राकेश पांडे, जगतारन डाहिरे, डॉ. दुर्गा मेरसा,ओमप्रकाश भट्ट, मनीषा भट्ट, डॉ.सर्वेश पाठक, अशरफी लाल सोनी, रमेश श्रीवास्तव,शिवशंकर श्रीवास्तव अमल, राकेश खरे, नरेंद्र शुक्ल आदि ने सरस रचनाओं की प्रस्तुति दी। जानकारी कवि हरबंश शुक्ल ने दी।