

श्रीसुर्या पुष्पा फाउंडेशन के डायरेक्टर गौरव शुक्ला का हमेशा से एक अलग विचार रहा है 4 साल सफर दिसम्बर मे फाउंडेशन कर रहा हैँ गौरव शुक्ला व टीम अलग-अलग कार्य करके समाज को बदलने की दिशा में कोशिश कर रहे हैं,और उनका कहना है कि एकता में बहुत ताकत है, जब वह आए थे तो अकेले थे, और आज उनके साथ पूरे छत्तीसगढ़ में 1000 से1500 लोग हैं जिनके साथ मिलकर निस्वार्थ भाव से सेवा कर रहे हैं, और आगे लोगों को रोजगार मुहैया कराना भी उनका सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य है।फाउंडेशन का 4 साल का सफर दिसम्बर मे होगा जिसमें अलग-अलग सामाजिक कार्यों में 5000 से ज्यादा एक्टिविटी का कार्य हो चुका है।आगे छत्तीसगढ़ में फाऊंडेशन का विस्तार करते हुए विभिन्न सामाजिक कार्यों पर फोकस करेंगे एवं महिला सशक्तिकरण पर भी उनका एक अलग विचारधारा के अनुरूप काम करने का विचार है, उनके द्वारा नारी शक्ति टीम भी गठित कर दी गई है, जिसकी शहरी प्रेसिडेंट आमना राजगीर, सगीता तिवारी महिला टीम है व इनके द्वारा महिला टीम गठित करके महिलाओं पर विशेष ध्यान रखते हुए उनके उत्थान की दिशा में काम लगातार जारी है, और उनके फाउंडेशन के द्वारा स्कूल के बच्चों को गुड टच ,बेड टच के बारे में भी जानकारी भी दी जा रही है, भविष्य में नशा मुक्ति केंद्र , वृद्धाश्रम, ब्लड बैंक खोलने का लक्ष्य है आगे ,इस संबंध में गौरव शुक्ला का कहना है कि हम उनके पूरे दुखों को खत्म तो नहीं कर सकते पर थोड़ा समय उनके साथ रह कर उनके दुखों को कम कर सकते हैं,सभी से अपील है वे भी ऐसा ही करें। जब आप उनसे आशीर्वाद लेने जाते हैं या इनसे मिलने जाते हैं तो इनको बड़ा सुकून मिलता है क्योंकि बुजुर्ग माता-पिता की सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं है आप कितने भी तीर्थ घूम लें और भगवान का पूजा कर लें,मगर आपको अपने बुजुर्गों का आशीर्वाद अगर ना मिले तो वह कम है ,माता-पिता की सेवा ही पहला धर्म है और इसी धर्म के साथ यह कार्य कर रहे हैं ,और समाज को एक संदेश दे रहे हैं, जिस तरह से वृद्ध आश्रम लगातार खुल रहे हैं, वह बहुत ही चिंता का विषय है, क्योंकि बच्चों में संस्कार डालना बहुत जरूरी है, ताकि बच्चे इस तरह का कदम उठाने से पहले सोच लें। आज के कार्यकम में जो पदाधिकारी शामिल हुए उनके नाम गौरव शुक्ला कमलेश गुप्ता,आमना राजगीर राघव साहू , टिकेश्वर साव धर्मेंश बंजारे , चंद्रकाता राजगीर , संगीता तिवारी ,सुवानी वृद्धाश्रम के संस्थापक श्याम तिवारी मौजूद थे!


