
बिलासपुर/वरिष्ठ पत्रकार एवं उपन्यासकार केशव शुक्ला का सद्यः प्रकाशित काव्य संग्रह ” माँ अरपा ” में उन्होंने नगर की जीवनदायिनी अन्तःसलिल अरपा की दुर्दशा पर लिखित यह पंक्ति – ” माँ अरपा पूछती है सवाल /मैंने क्या बिगाड़ा था लाल /क्यों उतार ली मेरी चमड़ी/ उगाती थी तुम्हारे लिए सब्जियां/ तरबूज ,खरबूज और ककड़िया/ बना देती थी निर्मल जल की सुंदर झिरिया-पंक्तियों को बहुत मार्मिक निरूपित करते हुए श्री सूर्या-पुष्पा फाउंडेशन तथा पोर्टल न्यूज के डॉयरेक्टर गौरव शुक्ला ने कहा
कि केशव जी की यह 30 कृति निश्चय ही साहित्य जगत के लिए उपलब्धि है।
उन्होंने आगे कहा कि ऐसी किताबें स्कूलों की लाइब्रेरी में रखी जानी चाहिए ताकि विद्यार्थीगण अपनी पवित्र नदी अरपा के विषय में जान सकें।