धान निराकरण को लेकर प्रशासन सख्त, वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश जारी

जिले में धान निराकरण को लेकर प्रशासन ने गंभीर रुख अपनाते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। इस संबंध में जारी आधिकारिक पत्र क्रमांक 6242 ख वि व – 2025-26 में धान निराकरण की प्रक्रिया को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।

क्या है पूरा मामला?

प्रशासन द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि चालू वित्तीय वर्ष के अंतर्गत धान खरीदी, भंडारण, परिवहन एवं लेखा-जोखा से संबंधित सभी लंबित प्रकरणों का विधिवत निराकरण सुनिश्चित किया जाए। धान निराकरण की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही या विलंब पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।

किन बिंदुओं पर दिया गया जोर?

समयबद्ध निराकरण – धान से संबंधित लंबित मामलों को निर्धारित अवधि में निपटाने के निर्देश।

रिकॉर्ड का सत्यापन – खरीदी, उठाव, भंडारण एवं वितरण से जुड़े अभिलेखों का मिलान।
पारदर्शिता सुनिश्चित करना –

पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं नियमों का पालन अनिवार्य।
प्रतिवेदन प्रस्तुत करना – संबंधित अधिकारियों को निराकरण की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश।

प्रशासन की मंशा

जानकारी के अनुसार, यह कदम धान खरीदी व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित बनाने, संभावित अनियमितताओं पर रोक लगाने तथा शासन स्तर पर स्पष्ट आंकड़े उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उठाया गया है। विशेष रूप से वित्तीय वर्ष की समाप्ति को देखते हुए विभाग ने कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
किसानों पर क्या होगा असर?
धान निराकरण की प्रक्रिया में तेजी आने से किसानों के भुगतान, स्टॉक मिलान एवं भंडारण संबंधी मामलों में स्पष्टता आएगी। इससे भविष्य की खरीदी प्रक्रिया भी अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है।

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