मर्यादा और स्वास्थ्य के संगम से बनेगा ‘राम राज्य’- ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

ब्रह्माकुमारीज़ शिव-अनुराग भवन में चल रहा रामायण, कल वाणी के दस सूत्रों पर होगा मंथन

  • रोगी, भोगी, योगी, त्यागी; सभी के लिए तंदुरुस्ती आवश्यक
  • सत्य, प्रेम, न्याय और त्याग— रामराज्य के आधार

बिलासपुर, 27 मार्च 2026।राजकिशोर नगर स्थित ब्रह्माकुमारीज़ के शिव-अनुराग भवन में आयोजित ‘रामायण का आध्यात्मिक महत्व एवं जीवन प्रबंधन’ विषयक नौ दिवसीय प्रवचन श्रृंखला के नौवें दिन मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने लंका विजय के बाद ‘अयोध्या वापसी’ के आध्यात्मिक रहस्यों को स्वास्थ्य प्रबंधन और ‘राम राज्य’ की अवधारणा से जोड़ते हुए जीवनोपयोगी संदेश दिए।

उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का वास होता है, इसलिए योगी, भोगी या त्यागी—हर व्यक्ति के लिए तंदुरुस्ती आवश्यक है। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य प्रबंधन के 10 सूत्र साझा करते हुए बताया कि गलत खान-पान, नशा, आलस्य और अनियमित दिनचर्या स्वास्थ्य के प्रमुख शत्रु हैं, जबकि अनुशासित जीवनशैली, मर्यादित भोजन, परिश्रम और प्रसन्नता स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि “स्वास्थ्य ही जीवन की वास्तविक संपत्ति है” और आंतरिक ख़ुशी सबसे उत्तम टॉनिक है।

मंजू दीदी ने ‘राम राज्य’ को आदर्श लोकतंत्र बताते हुए उसके चार प्रमुख आधार—सत्य, प्रेम, न्याय और त्याग—को समाज का वास्तविक प्रहरी बताया। उन्होंने कहा कि ये चारों गुण व्यक्ति और समाज को पतन से बचाकर उन्नति की ओर ले जाते हैं।

सीता जी के जीवन प्रसंग को उन्होंने आंतरिक शक्ति और आत्मसम्मान का प्रतीक बताते हुए कहा कि सच्चा सम्मान भीतर की दृढ़ता से प्राप्त होता है, न कि बाहरी परिस्थितियों से।

अंत में उन्होंने मोबाइल के दुरुपयोग से बचने और उसके सकारात्मक उपयोग की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम का समापन ‘ओम ध्वनि’ और परमात्म स्मृति के साथ हुआ, जिसमें उपस्थित सभी ने स्वयं को ‘पूर्वज आत्मा’ अनुभव करते हुए विश्व कल्याण का संकल्प लिया।

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