
हस्तनिर्मित राखी और स्वदेशी उत्पादों की रही सबसे ज्यादा मांग, लोकल कारीगरों और MSME को मिला सीधा लाभ: CAIT
बिलासपुर:
देश के सबसे बड़े व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने बताया कि इस वर्ष रक्षाबंधन के अवसर पर छत्तीसगढ़ में व्यापार और उत्साह दोनों अपने चरम पर रहे। त्योहार के साथ-साथ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को भी प्रदेश भर में व्यापक जनसमर्थन मिला।
CAIT के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जितेंद्र गांधी, राष्ट्रीय सचिव राजू सलूजा, प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेंद्र अजमानी, दिलीप खेंडेलवाल, बिलासपुर जिला अध्यक्ष हीरानंद जयसिंह, महामंत्री अनिल राघवानी, कोषाध्यक्ष आशीष अग्रवाल, संगठन महामंत्री परमजीत उबेजा, विष्णु गुप्ता, प्रवीण सलूजा, प्रमोद वर्मा और हरदीप होरा ने संयुक्त रूप से यह जानकारी दी।
छत्तीसगढ़ में ₹715 से ₹820 करोड़ का हुआ कारोबार
CAIT छत्तीसगढ़ के आकलन के अनुसार इस रक्षाबंधन पर प्रदेश में लगभग ₹715 से ₹820 करोड़ की आर्थिक गतिविधियां दर्ज की गईं। इसमें ₹575 से ₹650 करोड़ का अकेले राखी कारोबार शामिल है। इसके अलावा मिठाइयों, ड्राई फ्रूट्स, परिधानों, फैशन एक्सेसरीज़, FMCG गिफ्ट पैक्स, आभूषणों, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों और अन्य उपहार वस्तुओं पर लगभग ₹140 से ₹170 करोड़ की अतिरिक्त खरीदारी हुई।
बिलासपुर जिला अध्यक्ष हीरानंद जयसिंह ने बताया कि राजधानी रायपुर के साथ-साथ बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई, राजनांदगांव, कोरबा, अंबिकापुर, जगदलपुर और प्रदेश के छोटे शहरों व ग्रामीण बाजारों में भी राखी, उपहार सामग्री, मिठाई और परिधानों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।
खर्च का ब्रेकअप
₹140-170 करोड़ के उत्सवीय व्यय में अनुमानित खर्च इस प्रकार रहा:
- 25%: मिठाइयां एवं ड्राई फ्रूट्स
- 20%: परिधान एवं फैशन एक्सेसरीज़
- 20%: FMCG गिफ्ट पैक्स
- 15%: इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद
- 10%: सोना-चांदी एवं आभूषण
- 10%: अन्य उपहार वस्तुएं
‘सनातन अर्थव्यवस्था’ को मिली मजबूती
CAIT ने कहा कि भारत केवल उत्सवों का देश नहीं, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक और आर्थिक व्यवस्था है। दीपावली, होली, नवरात्र, गणेश उत्सव, दुर्गा पूजा, ईद, क्रिसमस और रक्षाबंधन जैसे पर्व किसानों, कारीगरों, शिल्पकारों, लघु उद्योगों, महिला उद्यमियों और थोक-खुदरा व्यापारियों की एक विशाल आर्थिक श्रृंखला को सक्रिय करते हैं।
राष्ट्रीय सचिव राजू सलूजा ने कहा, “भारतीय त्योहार केवल आस्था के प्रतीक नहीं हैं। ये रोजगार, व्यापार और आजीविका के अवसर सृजित कर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हैं।”
लोकल उत्पादों की बढ़ी मांग
इस वर्ष रक्षाबंधन पर हस्तनिर्मित राखियों, पारंपरिक उपहारों, स्थानीय कारीगरों द्वारा निर्मित वस्तुओं और महिला स्वयं सहायता समूहों व MSME के उत्पादों की मांग में भारी इजाफा हुआ। उपभोक्ताओं ने स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देकर लोकल व्यापार को सीधा समर्थन दिया।
कोषाध्यक्ष आशीष अग्रवाल और संगठन महामंत्री परमजीत उबेजा ने कहा, “रक्षाबंधन आस्था, स्नेह और आर्थिक समृद्धि का अद्भुत संगम है। यह पर्व भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय व्यापार को सशक्त बनाता है और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को आगे बढ़ाता है। छत्तीसगढ़ के बाजारों में दिखी रौनक इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश के उपभोक्ता अब स्वदेशी को अपना रहे हैं। यही प्रवृत्ति विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगी।”