कोनी में टसर किसानों की पाठशाला: वैज्ञानिकों ने सिखाए उन्नत पालन के गुर, ERR बढ़ाने पर दिया जोर

*बिलासपुर, 09 सितंबर 2026। मेरा रेशम मेरा अभिमान (MRMA) 2.0 के अंतर्गत कोनी में टसर कृषक समूह बैठक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य टसर कृषकों को उन्नत तकनीकों एवं वैज्ञानिक टसर रेशमकीट पालन, बीज उत्पादन, रोग एवं कीट प्रबंधन तथा क्षेत्र प्रबंधन संबंधी जानकारी प्रदान करना था। कार्यक्रम का संचालन सुश्री श्रुति जी. एच., वैज्ञानिक-बी, के.रे.बो.-बीएसएमटीसी, बिलासपुर द्वारा किया गया तथा राज्य रेशम विभाग के समन्वय से कार्यक्रम आयोजित हुआ।

बैठक के दौरान केंद्रीय टसर अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (CTRTI), रांची द्वारा विकसित एवं अनुशंसित विभिन्न तकनीकों के बारे में किसानों को जानकारी दी गई। इनमें नीम आधारित कीटनाशी, लीफ सरफेस माइक्रोबियल डिसइन्फेक्टेंट (LSM), जीवन सुधा, गॉल फ्लाई के एकीकृत प्रबंधन, डिप्यूरेटेक्स तथा नायलॉन नेट के अंदर चॉकी रेशमकीट पालन जैसी तकनीकों की उपयोगिता एवं प्रयोग विधि पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम में एस. के. कोल्हेकर, उप संचालक रेशम तथा ऋषि कुमार सिंह, सहायक संचालक रेशम, कार्यालय संयुक्त संचालक रेशम, बिलासपुर ने सहभागिता की।

इस अवसर पर एस. के. कोल्हेकर, उप संचालक रेशम ने गुणवत्तापूर्ण टसर बीज के महत्व पर प्रकाश डालते हुए किसानों को वैज्ञानिक टसर पालन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विशेष रूप से पालन क्षेत्र की स्वच्छता एवं साफ-सफाई (फील्ड सैनिटेशन) बनाए रखने तथा रेशमकीट पालन के दौरान आवश्यक सावधानियों का पालन करने पर जोर दिया।

वहीं, ऋषि कुमार सिंह, सहायक संचालक रेशम ने टसर उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने के लिए ERR (Effective Rate of Rearing) पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रति DFL अधिक से अधिक स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण कोकून प्राप्त करना आवश्यक है। उन्होंने पालन क्षेत्र के उचित रखरखाव, समय पर अंतर-सांस्कृतिक क्रियाओं (Intercultural Operations) तथा आवश्यक कृषि एवं रेशम पालन इनपुट्स का अनुशंसित मात्रा एवं उचित डोज में प्रयोग करने की सलाह दी, जिससे स्वस्थ रेशमकीट पालन के साथ बेहतर गुणवत्ता एवं अधिक कोकून उत्पादन प्राप्त किया जा सके।

बैठक के दौरान किसानों के साथ संवाद कर उनकी क्षेत्रीय समस्याओं एवं टसर पालन से संबंधित जिज्ञासाओं पर चर्चा की गई तथा वैज्ञानिक समाधान एवं तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

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