
महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, विश्व हिंदी परिषद और तुलसी साहित्य अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पखवाड़े का भव्य समापन
बिलासपुर / संवाददाता:
महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, विश्व हिंदी परिषद और तुलसी साहित्य अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में 14सितम्बर से आयोजित किए जा रहे ‘हिंदी पखवाड़े’ का समापन अत्यंत हर्षोल्लास, गरिमामय आयोजन के साथ संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक परम्परानुसार गुरू
पूजन से हुई। मुख्य अतिथि संस्कृताचार्य डॉ. पुष्पा दीक्षित जी के मार्गदर्शन में शिक्षा ग्रहण कर रहे विद्यार्थियों एवं ज्योतिषाचार्य डॉ.योगेन्द्र द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ महर्षि महेश योगी जी की वंदना, पूजा-अर्चना एवं दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ हुआ।
सर्वप्रथम अतिथि देवो भव: की परम्परा निर्वहन एवं महर्षि विश्वविद्यालय की संकायध्यक्ष डॉ. किरन श्रीवास्तव द्रारा स्वागत भाषण के पश्चात महर्षि विश्वविद्यालय एवं आयोजक संस्थाओं की ओर से संयुक्त रूप से मुख्य अतिथि संस्कृताचार्य डॉ. पुष्पा दीक्षित जी को उनके उत्कृष्ट साहित्यिक एवं सांस्कृतिक योगदान के लिए ‘संस्कृत श्री सम्मान’ से अलंकृत किया गया। जो विशेष रूप से हम सब के लिए गौरवान्वित करने वाला पल था । मुख्य अतिथि प्रतिष्ठित संस्कृताचार्य,विदुषि डॉ. पुष्पा दीक्षित जी ने अपने विचार रखते हुए कहा – “भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति की प्राण है। यदि हम भविष्य की संभावनाओं को आकार देना चाहते हैं, तो हिंदी के प्रचार-प्रसार में आ रही कमियों को सुधारते हुए पूरी निष्ठा और संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा। हमारी संस्कृति की रक्षा तभी सम्भव है जब हर घर में गीता और रामचरितमानस पढ़ी जयेगी ।”
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महर्षि यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. नरेश कुमार तिवारी जी अपने उद्बोधन में कहा -“यह अत्यंत चिंता और विचारणीय विषय है कि हम स्वतंत्रता के इतने वर्षों बाद भी हिंदी को राष्ट्रभाषा का उचित स्थान नहीं दिला सके हैं। हमें एक दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा ताकि हम हिंदी को उसका वास्तविक और गौरवपूर्ण स्थान दे सकें।” कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में छंदाचार्य एवं विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्थाओं को मार्गदर्शरित करने वाले प्रख्यात साहित्यकार डॉ. बृजेश सिंह जी उपस्थित रहे। इन्होने “हिंदी को हमारी अस्मिता और अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम बताया । छंद और साहित्य की धारा तभी जीवित रहती है जब जन-जन के मुख पर मातृभाषा का सम्मान हो।” उनके साथ ही विश्व हिंदी परिषद की प्रदेश अध्यक्ष, इनरव्हील क्लब की अध्यक्ष तथा प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स की डिजिटल मीडिया विभाग की प्रदेश संयोजिका डॉ. संगीता बनाफर जी ने भावपूर्ण हिंदी वंदना प्रस्तुत करते हुए कहा, “राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र का श्रृंगार अधूरा है। विश्व हिंदी परिषद इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए समर्पित है; आइए हम सब मिलकर हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ें, तो निश्चित ही हम अपने लक्ष्य तक पहुंचेंगे।” तुलसी साहित्य अकादमी के राष्ट्रीय महासचिव एवं केरल प्रभारी श्री चंद्र प्रकाश बाजपेयी जी ने इस अवसर पर अपने विचार रखते हुए कहा, “साहित्य और संस्कृति के संवर्धन से ही राष्ट्र मजबूत होता है। हिंदी पखवाड़े जैसे आयोजन नई पीढ़ी को उनकी जड़ों से जोड़ने और भाषा के प्रति निष्ठावान बनाने का एक उत्कृष्ट माध्यम हैं।”
इसके साथ ही महर्षि यूनिवर्सिटी की एसोसिएट प्रोफेसर एवं विश्व हिंदी परिषद की महासचिव (शैक्षणिक प्रकोष्ठ) डॉ. अनिता ने अपने वक्तव्य में स्वामी विवेकानंद जी का एक प्रेरणादायक प्रसंग सुनाते हुए कहा, “स्वामी विवेकानंद के विचार और मूल्य हमें यह सिखाते हैं कि अपनी स्वभाषा और संस्कृति के स्वाभिमान के साथ ही राष्ट्र का वास्तविक उत्थान संभव है।”
पिछले पंद्रह दिनों के दौरान महर्षि यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों के लिए भाषण, कविता पाठ, निबंध लेखन और प्रश्नोत्तरी जैसी विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया था । समापन समारोह के अवसर पर इन प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को मुख्य अतिथि के करकमलों से प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। यह पखवाड़ा हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार, वैचारिक मंथन और विद्यार्थियों में भाषा के प्रति प्रेम जगाने के अनूठे संकल्प के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। मंच संचालन उपेन्द्र कुमार (सहायक प्राध्यापक हिन्दी विभाग)एवं आभार ज्ञापन डॉ.अनिता सिंह ( विभागाध्यक्ष -हिंदी) ने किया ।
इस अवसर पर विद्यार्थियों के साथ-साथ संस्था के सभी प्राध्यापकगण , विभागध्यक्ष और विभिन्न दायित्वों के प्रभारी उपस्थित रहे।