
बिलासपुर! नगर के सांई आनंदम् परिसर में नित्य की भांति साहित्यिक चर्चा हुई, विगत दिनों इसी परिसर में जांजगीर से पधारे साहित्यकारों से एक वृहद कार्यशाला सजल, छंद,
दोहा, नई कविता और नवगीत पर कार्यशाला आयोजित की गई थी जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ कवि, गीतकार विजय तिवारी,के साथ अभ्यागत,ईश्वरी प्रसाद यादव, सतीश सिंह, विजय राठौर रहे।
इसी क्रम में तत्काल द्वितीय अंक काव्यशिल्प, कविताओं पर नवीन प्रयोग, अन्वेषण या बाध्यता पर चर्चा हुई जिसमें वरिष्ठ कवि सेवानिवृत्त तहसीलदार डा. देवधर महंत, वरिष्ठ कवि एवं गीतकार विजय तिवारी ने कहा कि काव्य में सर्वप्रथम भावाभिव्यक्ति का स्थान होता है वह काव्य की आत्मा है, भावना प्रधान काव्य पर ही लक्षणा, लाक्षणिकता, व्यंजना को संयोजित किया जाता है तत्पश्चात ही रचनाकार उसे शिल्प प्रदान कर सकता है, तब उसकी संप्रेषणीयता काबिलेतारीफ होती है भावनाहीन रचना मृतप्राय होती है यही कारण है कि आज लोग लिख तो रहे हैं पर रचना हृदयहीन और उबाऊ हो जाती है, अतिथि डा. देवधर महंत ने कहा रचना कालजयी बनाने हेतु गेयता ही पर्याप्त नहीं, रचना पर मंथन भी आवश्यक तत्व होता है, विषयवस्तु समसामयिक और देशकाल से अभिप्रेरित होना चाहिए, कार्यक्रम का संचालन हरबंश शुक्ल ने किया वरिष्ठ कवि अमृत लाल पाठक ने भी नवाचारित प्रयोगो से सतर्कता और सावधानी पर बल दिया, काव्य गोष्ठी में हूप सिंह ठाकुर, राकेश पांडेय, अशरफी लाल सोनी, राजेश सेवतकर,
ओम प्रकाश भट्ट, डा. देवधर महंत, अमृत लाल पाठक विजय तिवारी, विनय पाठक, हरबंश शुक्ल सहित अनेक कवियों ने काव्य पाठ किया।
यह जानकारी हरबंश शुक्ल ने दिया।