झूठी शिकायत करने से सराफा कारोबार पर संकट, कार्रवाई से पहले निष्पक्ष जांच की मांग की बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह से -कमल सोनी प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन

छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन ने अवैधानिक और सोना चाँदी के बढ़ते भाव में लालच वश आधारहीन शिकायतों के आधार पर सराफा व्यापारियों पर की जा रही पुलिस में ग़लत शिकायत कको लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। एसोसिएशन के अध्यक्ष कमल सोनी ने इस संबंध में बिलासपुर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देकर बिना विस्तृत जांच के दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है।
अध्यक्ष श्री सोनी ने श्रीसूर्या पुष्पा न्यूज़ पोर्टल को बताया कि ऐसे मामलों में व्यापारिक दृष्टिकोण से तथ्यात्मक जांच बेहद जरूरी है।
शहर के कई सराफा व्यापारी अपने परिचित उपभोक्ताओं को सोने-चांदी के आभूषण गिरवी रखकर ऋण प्रदान करते हैं जो पूरी तरह एक व्यावसायिक प्रक्रिया है। तय समयावधि में यदि लेनदार ऋण और ब्याज नहीं चुकाता तो नियमों के अनुसार गिरवी रखे गए आभूषण व्यापारी गलाकर बकाया ब्याज सहित समावेश कर लेता हैं।
वर्तमान में सोने के बढ़ते भाव को देखकर कुछ मामलों में लेनदार पुराने मामलों को दोबारा उठाकर पुलिस में शिकायत दर्ज करा रहे हैं।
इसका एकमात्र उद्देश्य अनुचित आर्थिक लाभ हैं ।
व्यापारियों पर झूठी और भ्रामक शिकायतें दर्ज कराकर पुलिस को गुमराह किया जा रहा है जिससे निर्दोष सराफा व्यापारियों को मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। हाल के दिनों में बिलासपुर के कुछ ज्वेलर्स के खिलाफ इसी तरह की शिकायतें सामने आई हैं।

छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि किसी भी शिकायत पर कार्रवाई से पहले उसकी गहन और निष्पक्ष जांच की जाए
तथा यह देखा जाए कि क्या लेनदार ने निर्धारित अवधि के भीतर ऋण चुकाने का प्रयास किया था या नहीं?

संगठन ने सुझाव देते हुए कहा कि ऐसे किसी मामले में शिकायत आने पर अन्य प्रतिष्ठित व्यापारी संगठन के पदाधिकारी की मध्यता का लाभ भी लिया जाए,यह दोनों पक्षों के लिए अच्छी पहल साबित होगी इसके बाद जो भी निर्णय आएगा उसे स्वीकार किया जाएगा।

बढ़ते भाव में लालच वश कुछ उपभोक्ता ऐसा कर रहे है ऐसी ही स्थिति रही तो आने वालो दिनों में ऐसी बहुत सी झूठी शिकायते आने की संभावना है
सोनी ने बताया अभी हलफ़ीलहाल में पूरे भारत से ऐसी शिकायतें सुनने में आ रही है
बस ध्यान देने वाली बात है की कर्जदार २-३ वर्षों में कभी ब्याज नहीं दिया उसकी रकम गहन किए समान से बहुत ज़्यादा हो गई है और वो जानकर भी अपना गहन छुड़वाने नहीं आया

समयावधि ख़त्म होने पर जब उसका सामान से वायपारी हिसाब को समायोजित कर चुका है तो
इतने वर्षों बाद उसका नैतिक एवं वैधानिक अधिकार नहीं होता
वो पुलिस में शिकायत करके गुमराह कर रहा है
बस

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