बिलासपुर: ‘क्षमा’ ही दुआओं का प्रथम सोपान – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

शिव-अनुराग भवन में हनुमान जन्मोत्सव पर विशेष आयोजन

बिलासपुर। राजकिशोर नगर स्थित ब्रह्माकुमारीज़ के शिव-अनुराग भवन में आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने जीवन को सुखी और संतुलित बनाने के लिए ‘दुआओं के महत्व’ तथा हनुमान जयंती के आध्यात्मिक संदेशों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

सभा में “दुआ दो और दुआ लो” के सूत्र पर प्रकाश डालते हुए दीदी ने कहा कि दुआएं देना आत्मा की सर्वोच्च स्थिति का प्रतीक है।
क्षमा ही आधार है: किसी को दुआ देने से पहले उसे क्षमा करना आवश्यक है। क्षमा के बिना मन का बोझ समाप्त नहीं होता।
विशाल हृदय: दुआएं केवल शुद्ध, निर्मल और विशाल हृदय से ही सहज रूप से निकलती हैं।
ड्रामा की समझ: जब आत्मा यह समझ लेती है कि हर व्यक्ति अपने-अपने पार्ट में बंधा है, तब वह किसी को दोष देने के बजाय सहज भाव से दुआ देने लगती है।

हनुमान जन्मोत्सव : सेवा, समर्पण और भावना का प्रतीक
हनुमान जयंती के संदर्भ में दीदी ने ‘हनुमान’ शब्द का आध्यात्मिक अर्थ समझाते हुए कहा कि हनुमान वह है, जिसने अपने ‘मान’ (अहंकार) का हनन कर दिया और ‘अनुमान’ (व्यर्थ विचारों) से स्वयं को मुक्त कर लिया।

उन्होंने बताया कि हनुमान जी का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची शक्ति बाहरी बल में नहीं, बल्कि आंतरिक भक्ति, समर्पण और निस्वार्थ सेवा में निहित है। उनका जीवन “राम काज कीजे बिना, मोहि कहाँ विश्राम” के संकल्प के साथ निस्वार्थ सेवा, विनम्रता और अटूट भक्ति का उदाहरण है।

कार्यक्रम के अंत में ब्र.कु. रूपा दीदी ने सभी को फल व मेवे का प्रसाद वितरित किया।

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