“NGO एक, सेवा नेक”: तस्वीरें बनीं गवाह, बाढ़ में डूबे बिलासपुर के लिए फरिश्ते बनकर उतरा महागठबंधन

बिलासपुर, 19 जुलाई 2026। जब शहर पानी में डूबा और सरकार के कदम डगमगाए, तब बिलासपुर NGO महागठबंधन के योद्धाओं ने मौत को मात दे दी। “सेवा परमो धर्मः” की मशाल लेकर ये वो कर दिखाया जो तस्वीरें खुद बयां कर रही हैं।

तस्वीर 1: कीचड़ में उम्मीद
पीली जैकेट में NGO दीदी और साथी घुटने-घुटने पानी में खड़े हैं। हाथ में काले पैकेट, सामने भूख से बिलखते बच्चे। कार के बोनट पर रखकर, गली के नुक्कड़ पर खड़े होकर – जहाँ भूख मिली, वहाँ रोटी पहुंचाई। ये फोटो नहीं, इंसानियत का सबूत है।

तस्वीर 2: स्कूल बना आसरा
शासकीय मिडिल स्कूल, बिजौर का हॉल। दरी पर बैठी माएँ, गोद में दुधमुंहे बच्चे, बगल में बुजुर्ग। थाली में खाना, हाथ में पानी का गिलास। जो कल तक अपने घर में डूब रहे थे, आज महागठबंधन की छांव में रोटी तोड़ रहे हैं।

तस्वीर 3: जख्मों पर मरहम
साड़ी पहने डॉक्टर दीदियां दवाइयों का अंबार लगाकर बैठी हैं। बाढ़ के बाद फैलते बुखार, उल्टी-दस्त, चर्म रोग से लड़ने को तैयार। रोटी के साथ दवा – क्योंकि बीमार पेट रोटी भी नहीं पचा पाता।

तस्वीर 4: रात का कंबल
अंधेरी रात, सड़क का किनारा। युवा कार्यकर्ता हाथों में कंबल और कपड़ों का बंडल लिए खड़े हैं। जिस माँ का सब कुछ बह गया, उसके तन पर कपड़ा महागठबंधन डाल रहा है। क्योंकि इज्जत, रोटी से बड़ी होती है।

तस्वीर 5: भूख की कोई टाइमिंग नहीं
रात के 10 बज रहे हैं। स्ट्रीट लाइट के नीचे टेबल लगाकर खाना बांटा जा रहा है। एक हाथ में थाली, दूसरे में आस। ये साबित कर दिया: भूख सोती नहीं, तो हम कैसे सो जाएं?

मैदान-ए-जंग: बगदाई मंदिर, बिजौर से डीएलएस कॉलेज, कामता राय रोड तक। साहू भवन, बहतराई से स्कूल के राहत शिविर तक। सुबह और शाम – बिना रुके, बिना थके।

सेवा के असली हीरो
इस महायज्ञ में NGO महागठबंधन परिवार का एक-एक सदस्य ने मेहनत की, सहयोग दिया। कोई छोटा नहीं, कोई बड़ा नहीं। जिसने बैनर पकड़ा, जिसने बर्तन धोए, जिसने गाड़ी चलाई, जिसने चंदा दिया – सबने अपना लहू-पसीना एक कर दिया। यही है असली “नर सेवा नारायण सेवा”। यहाँ नाम नहीं, काम बोलता है।

जंग का ऐलान – महागठबंधन की हुंकार:
“इन तस्वीरों को गौर से देखो। ये प्रेस के लिए पोज नहीं हैं। ये वो पल है जब पूरे परिवार ने जान हथेली पर रखी है। कीचड़ में सने ये पैर, रात में जलती ये टॉर्च, दवा बांटते ये हाथ – कसम है इनकी। जब तक आखिरी आदमी के तन पर कपड़ा, पेट में रोटी और हाथ में दवा नहीं होगी, तब तक महागठबंधन का एक भी सिपाही घर नहीं जाएगा। ये भीष्म प्रतिज्ञा है।”

महामंत्र: ॥ सेवा परमो धर्मः ॥ ॥ नर सेवा नारायण सेवा ॥

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *