

नगर के साहित्य
जगत की धरोहर: वाजपेयी
बिलासपुर/विगत संध्या साढ़े चार बजे सांई आनंदम परिसर उसला पुर में साहित्य मनीषी और वरिष्ठ गीतकार विजय कल्याणी तिवारी की नवमीं कृति ,, अब हम रहते डरे डरे,,का एक गरिमामय समारोह में विमोचन संपन्न हुआ।
इस विमोचन समारोह में मुख्य अभ्यागत न्यायमूर्ति चन्द्र भूषण वाजपेयी एवं अध्यक्षता बिलासपुर साहित्य जगत को गतिमान रखने वाले डॉ.विनय कुमार पाठक कुलपति थावे विद्यापीठ थे और विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार केशव शुक्ला रहे ।
मुख्य अतिथि की आसंदी से न्यायमूर्ति चंद्र भूषण वाजपेयी जी ने कहा कि यह काव्य संग्रह बिलासपुर साहित्य जगत की धरोहर है। उन्होंने उल्लेख किया कि आमतौर पर लोग अपने पिता का नाम अपने माँ का नाम अपने साथ लगाते हैं लेकिन विजय तिवारी जी ने अपनी सहधर्मिणी का नाम अपने साथ जोड़ कर एक नया आयाम स्थापित किया है। उन्हें बधाई।
अध्यक्षता कर रहे डॉ. विनय कुमार पाठक जी ने संग्रह की कविताओं के भाव और शिल्प की चर्चा करते हुए सनातन परंपरा में गीतों के इतिहास का वर्णन किया और इस संग्रह की रचनाओं को कालजयी बताया।
केशव शुक्ला जी ने ‘ अब हम रहते डरे डरे ‘ टाइटल को विश्व परिदृश्य से जोड़ कर चर्चा की।पुस्तक पर अमृत लाल पाठक, बुधराम यादव,रेखराम साहू, ओमप्रकाश भट्ट,मयंक मणि दुबे जी ने पुस्तक पर विस्तार पूर्वक चर्चा करते हुए कहा कि गीत और उसके छंद विधान तथा गेयता को समझना है तो इस किताब को ठीक से पढ़ लें।
कवि विजय तिवारी जी ने अपने अनुभव साझा करते हुए इस संग्रह के प्रतिनिधि गीतों का प्रभाव पूर्ण गायन किया।समारोह में असरफी लाल सोनी,राजेश सेवतकर,शैलेन्द्र गुप्ता, शिव शरण श्रीवास्तव, मनीषा भट्ट, अंतिमा दुबे, पूर्णिमा तिवारी, विष्णु तिवारी,शिव मंगल शुक्ला, रामनिहोरा राजपूत,सुरेश पांडेय, लक्ष्मीकांत शुक्ला आदि नगर के साहित्यकार एवं प्रबुद्ध नागरिक मौजूद थे।