
मैं आज उस चिकित्सा समस्या के सम्बन्ध मे कहना चाहूँगा जो हमारे राज्य के ग्रामीण अंचलों मे है, जब कभी अर्धरात्रि या अचानक से हुई आपातकालीन चिकत्सा की जरूरत ग्रामीण अंचलो के लोगों को होती है तो सबसे पहले हम जैसे प्रथमिक सेवा ग्रमीण चिकित्सक को कॉल करते है और हम भी उनकी परेशानियों को नजर अंदाज किये बिना ही उनकी सेवा मे लग जाते है फिर भी लोग हमें झोलाछाप डॉक्टर कहते है , जितना हमसे सेवा बनता है हम करते है लेकिन जब वह हमारे सामर्थ के बाहर होता है तो हम शहर के विद्वान डॉक्टरों से संपर्क कर उनके सलाह व उचित मार्गदर्शन पर कार्य करते है जिससे एक दूर दराज मे रहने वाले ग्रामीणों को चिकत्सा से सम्बंधित उचित मदद मिल सके इसे यह माना जा सकता है की अनुभवी डॉक्टरों के बिना हम अधूरे है और हमारे बिना ग्रामीण क्षेत्र के लोग अधूरे है इसलिए चिकत्सा के नियम का सेतु ऐसी होनी चाहिए जिससे ग्रामीण क्षेत्र का एक अस्वस्थ व्यक्ति हमारे सीढ़ी मे चढ़कर आपके मंजिल पहुँच जाये और एक अच्छे चिकत्सा का लाभ ले सके, लेकिन सीढ़ी का सबसे प्रथम कड़ी हम छोटे ग्रामीण अंचल के चिकित्सक है इसलिए सरकार को हमें थोड़ा मजबूत करना चाहिए जिससे हम ग्रामीण क्षेत्रों के अस्वस्थ लोगों का स्वास्थ्य सेवा ठीक से कर सकें और हमारे ऊपर विराजमान वरिष्ठ व अनुभवी डॉक्टरों को भी हमें आशीर्वाद प्रदान करना चहिये जिससे हम उनके कुशल मार्गदर्शन से चिकत्सा के क्षेत्र मे एक अच्छा मार्ग प्राप्त कर सकें। मेरी स्वास्थ्य मंत्री जी से गुजारिश है की किसी ऐसे योजना का लाभ हमको दे जिससे हम पर झोलाछाप डॉक्टर होने का दाग़ हट सके।