
बिलासपुर, 14 फरवरी 2026
मेडिटेशन ट्रेनिंग सेंटर, ब्रह्माकुमारीज द्वारा आयोजित शिवमंगल मिलन मेला के अंतर्गत “सनातन हिन्दू सम्मेलन” का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय “भारत का आधार – हिंदुत्व” रहा।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता आदरणीया बी.के. स्वाति दीदी जी रहीं जो ब्रह्माकुमारीज सेवा केंद्र, बसटैंड की इंचार्ज एवं छत्तीसगढ़ गौरव रत्न से सम्मानित हैं जिन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि सनातन धर्म केवल एक पंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की श्रेष्ठतम वैज्ञानिक पद्धति है। उन्होंने बताया कि हिंदुत्व का अर्थ किसी विशेष समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि समस्त मानवता को सत्य, अहिंसा, करुणा, आत्मसंयम और विश्वकल्याण की भावना से जोड़ना है।
दीदी जी ने आध्यात्मिकता को वर्तमान समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि जब मनुष्य स्वयं के सत्य परिचय के साथ परमात्मा से संबंध जोड़ता है, तभी उसके जीवन में शांति, शक्ति और संस्कारों की पुनर्स्थापना होती है।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि श्री प्रमोद कश्यप जी पूर्व जिला मंत्री, विश्व हिन्दू परिषद; वर्तमान छत्तीसगढ़ प्रांत परावर्तन प्रमुख ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक और प्राचीन संस्कृति का समन्वय ही भारत को विश्वगुरु बना सकता है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे भारतीय ज्ञान परंपरा पर गर्व करें और उसे जीवनशैली का हिस्सा बनाएं।
विशिष्ट अतिथि श्री पार्थो मुखर्जी जी, संयोजक – वंदे मातरम् मित्र मंडल अरपा पार शाखा एवं हिन्दू जागरण मंच जिला सहसंयोजक ने कहा कि भारत की पहचान उसकी सनातन परंपरा, परिवार व्यवस्था, संस्कार और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से है। यदि हमें राष्ट्र को सशक्त बनाना है तो अपनी जड़ों, संस्कृति और धर्ममूल्यों को समझकर उन्हें व्यवहार में लाना होगा।
इस अवसर पर मेला आयोजन समिति के अध्यक्ष बी.के. विकास सोनी जी जो मेडिटेशन ट्रेनर एवं अखिल भारतीय हिंदी महासभा, उत्तर छत्तीसगढ़ के प्रांत महामंत्री हैं ने कहा कि शिवमंगल मिलन मेला का उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक जागरण, नैतिक मूल्यों की स्थापना तथा तनावमुक्त, संस्कारित जीवनशैली का प्रसार करना है। उन्होंने बताया कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने, संवाद बढ़ाने और सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनते हैं।
इसके अलावा मंच पर श्री गौरव धनकर एवं श्री अनिमेष सोनी जी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन बी.के. शारदा बहन ने किया एवं बी.के. अंजली बहन द्वारा संस्था का परिचय दिया गया।
उपस्थित जनसमूह ने संकल्प लिया कि वे अपने जीवन में भारतीय संस्कृति, नैतिकता, पारिवारिक मूल्यों और आध्यात्मिक साधना को अपनाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनेंगे।
सम्मेलन का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रभावना से ओत-प्रोत रहा।

