
बिलासपुर/ विप्र स्मृति साहित्य संगम समिति के तत्वावधान में गत् 2 नवंबर की शाम साईं आनन्दम् उसलापुर में दीपावली मिलन समारोह सम्पन्न हुआ।इस अवसर पर एक से एक रचनाओं का उपस्थित कवियों ने पाठ किया।
भारतीय संस्कृति में दीप ज्योति और प्रकाश पर्व को अध्यात्म से एवं मानसिक तम से जीवन में उत्पन्न अवरोध, बाधाओं अलगाव- वादी विचारों को प्रश्रय मिलने पर साहित्यकारों ने चिंता व्यक्त की तथा बाह्य प्रकाश से अंतर्प्रकाशित होने के प्रति जनमानस में काव्य के माध्यम से अंतर्दृष्टि विस्तारित करने पर बल दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ गीतकार सजलकार अमृतलाल पाठक ने की।संचालन करते हुए हरबंश शुक्ल ने सर्वप्रथम मयंकमणि दुबे को प्रथम कवि के रूप में प्रस्तुत किया।
उन्होंने अपनी रचना के माध्यक्म से कहा-ब्रह्माण्ड में विचरण करते हुए शब्दों को कविगण अपनी- अपनी भावनाओं के अनुरूप ही उनकी सृजनधर्मिता उद्धृत होती है, तथा बादलों में भी व्यक्ति अपने विचार एवं चिंतन के अनुसार चित्र खोज लेता है।
वरिष्ठ कवि,गीतकार विजय तिवारी ने अपनी अनुष्टुप छंद रचना धर्मिता के माध्यम से यह कहा कि प्रातःकाल ही यदि मनुष्य के मन में कलुषित भावनाओं का प्रवेश हो जाये तो शाम को वह निष्फलता के साथ ही अपने निकेतन लौटेगा, अर्थात जीवन सहिष्णुता और प्रेम चिंतन का है तभी कर्म के सद्फल को प्राप्त हो सकते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अमृतलाल पाठक ने अपनी रचना के माध्यम से आज की जीवन शैली पर कटाक्ष करतेh कहा कि “चिल्लाना मना है किन्तु गीत गाने पर प्रतिबंध नहीं है” निरुद्देश्य लकीर पीटने से अच्छा सृजन करते रहना चाहिए ।वरिष्ठ कवि बुधराम यादव, ओमप्रकाश भट्ट, हूप सिंह क्षत्री, राजेश सोनार, राकेश खरे, रेखराम साहू, विनय पाठक, पदुमदास वैष्णव,राकेश पांडेय, एन.के.शुक्ल, रामनिहोरा राजपूत,अंजनी तिवारी, दिनेश तिवारी, देवेंद्र शर्मा पुष्प, राजेन्द्र रुंगटा श्रीमती उषा तिवारी, पूर्णिमा तिवारी एवं हरबंश शुक्ल ने भी अपनी-अपनी बारी में दीपावली पर केंद्रित सरस रचनाओं का पाठ किया।अंत में आभार प्रदर्शन मयंक मणि दुबे ने किया।