जीवन दर्शन की विवेचनकरती हैं कविताएं:डॉ. पाठक

बिलासपुर/प्रयास प्रकाशन द्वारा वरिष्ठ कवयित्री श्रीमती रेखा ठाकुर जी का काव्य संग्रह “ अनुभूति की सुरभि “ का विमोचन एवं सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि थावे विद्यापीठ गोपालगंज बिहार के कुलपति डॉ.विनय कुमार पाठक जी ने कहा- रेखा ठाकुर जी मूलतः कवयित्री हैं।इनकी अधिकांश रचनाएं जीवन दर्शन की विवेचना करती हैं।इसमें लौकिक और अलौकिक संस्कृति ,सभ्यता,परंपरा और प्रगतिशीलता तथा कल और आज का सुंदर समन्वय है।
विशिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति चंद्रभूषण वाजपेयी जी ने कहा-रेखा जी की कविताओं में जहाँ सनातन परंपरा का उल्लेख हुआ है वहीं प्रकृति की पूर्णता का भी चित्रण हुआ है।ऐसी कविताओं को उन्होंने उपस्थित जनों के समक्ष प्रस्तुत किया।
विशिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति राजेन्द्र चंद्र सिंह सामन्त जी ने कहा-रेखा जी की कविताएं समकालीनता को सहेजती हैं साथ ही जीवन को उत्सवधर्मी भी बनाती हैं।अनुभूति की सुरभि अनुभूतियों का आगार है,इसमें कोई दो मत नहीं है।
इस समारोह के अध्यक्ष एवं शासकीय जे. पी.वर्मा स्नातकोत्तर कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. श्यामलाल निराला जी ने कहा-कविताओं में विविध भावों की अनुभूतियां छिपी हैं।आपने कवयित्री के मनोभावों को उनकी रचनाओं को पढ़कर स्पष्ट किया।होली पर उनकी रचना ‘ होली रंगों का त्योहार ‘का उन्होंने उल्लेख किया ।आरंभ में स्वागत भाषण डॉ. अनिता सिंह जी ने व्यक्त किया।इससे पूर्व डॉ. संगीता बनाफर जी ने सरस्वती वंदना की तथा आर.एन.राजपूत ने स्वागत गान किया।संपूर्ण कार्यक्रम का कुशल संचालन तुलसी साहित्य समिति के डॉ. राघवेंद्र दुबे जी ने किया।अंत में आभार रंजीत सिंह पवार जी ने व्यक्त किया।
इस अवसर पर पूर्व न्यायाधीश श्री सुरेन्द्र तिवारी, उपन्यासकार केशव शुक्ला,अंजनी कुमार तिवारी सुधाकर, राजेश सोनार, राजेन्द्र रूंगटा, सलीम खान, आशीष श्रीवास, डाॅ.संगीता बनाफर, रमेश चन्द्र श्रीवास्तव,डाॅ.स्मृति सोनी, अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री मदनमोहन अग्रवाल ,सुश्री एकता गुप्ता एवं कवयित्री के परिवारजन उपस्थित थे।
रेखा ठाकुर का विभिन्न महाविद्यालयों से आये हुए तथा साहित्यकारों एवं समितियों द्वारा भी शाल श्रीफल एवं मोमेंटो भेंट करके सम्मान किया गया।अपने स्वागत भाषण में डाॅ.अनिता सिंह ने कवयित्री रेखा ठाकुर का परिचय एवं उनके साहित्यिक एवं सामाजिक सेवा की जानकारी देते हुए कहा कि प्रस्तुत कृति में कवयित्री ने अनुभूतियों की सुरभि को बहुत ही खूबसूरती से सहेजा है जो सीधे पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है । निश्चय ही यह कृति सुरभि का गुलदस्ता है जिसमें जीवन के विभिन्न रंगों को सजाया गया है।