परिवार, समाज और संस्था तीनों स्तर पर समरसता के लिए आपसी सम्मान जरूरी – ब्र.कु. मंजू दीदी

बिलासपुर, (राज किशोर नगर)
ब्रह्माकुमारीज़, शिव अनुराग भवन, राज किशोर नगर में आज गुरुवार को आयोजित विशेष आध्यात्मिक सत्र में “आज्ञाकारिता, विनम्रता एवं बड़ों के सम्मान” जैसे जीवन-सिद्धांतों पर विस्तृत चर्चा हुई।
ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने कहा कि आज्ञाकारिता केवल अनुशासन का विषय नहीं, बल्कि संस्कार, आदर और सामूहिक उन्नति का आधार है।

दीदी ने स्पष्ट किया कि परिवार, संस्था और समाज – तीनों स्तरों पर समरसता तभी विकसित होती है जब पीढ़ियों के बीच सम्मान, धैर्य और सौहार्द बना रहे। उन्होंने यह भी कहा कि बड़ों का आदर केवल औपचारिक व्यवहार नहीं, बल्कि उनका अनुभव, मार्गदर्शन और सुरक्षा-भावना के प्रति कृतज्ञता का प्राकृतिक प्रदर्शन है।

दीदी ने कहा कि आज्ञाकारिता मनुष्य के चित्त को स्थिर और विनम्र बनाती है, जिससे जीवन में सीखने की क्षमता विकसित होती है। जहाँ अनुशासन और सम्मान स्थापित होते हैं, वहाँ परिवार में खुशहाली तथा संस्थाओं में कार्यक्षमता स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है।

दीदी ने राजयोग के माध्यम से “ईश्वरीय आज्ञाओं” के पालन को जीवन-उन्नति का आधार बताया और कहा कि जब व्यक्ति श्रीमतभगवत गीता ज्ञान या कहें की भगवान की आज्ञा के अनुसार जीवन को संयमित करता है, तो उसके विचार, व्यवहार और कर्म स्वभाविक रूप से श्रेष्ठ होते जाते हैं।

अंत में दीदी ने दोहराते हुए कहा कि आज्ञाकारिता, सम्मान और विनम्रता – ये तीनों मूल्य आध्यात्मिक जीवन के स्तंभ हैं, जिनके आधार पर समाज में आदर्श संस्कृति का निर्माण संभव है।

सभी ने कमला दीदी जी की तृतीय पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धांजलि देते हुए सद्गुरुवार का भोग स्वीकार किया।

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