नगर के आचार्यों द्वारा म.प्र.मेंदश-महाविद्या का अनुष्ठान

बिलासपुर/ मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के समीप साईंखेड़ा नगर में नर्मदा तट समीप झिकोली में बिलासपुर के आचार्यों द्वारा दश-महाविद्या एवं श्रीविद्या का अनुष्ठान सम्पन्न कराया जायेगा।
उक्त पूरा अनुष्ठान बिलासपुर निवासी धर्मभूषण डॉ.पं.श्रीधर गौरहा के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में सम्पन्न होने जा रहा है। इस अनुष्ठान में मोरबी गुजरात की सुप्रसिद्ध कथावाचिका एवं अग्निपीठ अखाड़े की पहली महिला महामंडलेश्वर साध्वी माता कनकेश्वरी देवी का सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का भी आयोजन हो रहा है। बिलासपुर से भागवताचार्य पं. संकल्प शुक्ला, आचार्य पं. चिरंजीव पाण्डेय, पं. शिवम पाण्डेय, परिचालक पं. आदित्य बाजपेयी, पं. लव चौबे एवं पं. अभिषेक तिवारी महाविद्या अनुष्ठान सम्पन्न कराने जा रहे हैं। अवगत हो कि नरसिंहपुर जिले के आगे गाडरवारा स्टेशन से लगभग 30 किमी दूर साईंखेड़ा झिकोली में नर्मदा तट किनारे श्रीगुरुकृपा आश्रम संचालित है और यह क्षेत्र धूनीवाले दादाजी की तपस्थली के रुप में विख्यात है। कार्यक्रम आयोजक आश्रम प्रमुख साध्वी माता अंजनीदास एवं रामदास जी महाराज हैं । इस आयोजन से आसपास के क्षेत्र में उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना हुआ है।
इस वृहद अनुष्ठान के मार्गदर्शक डॉ. पं. श्रीघर गौरहा के श्रीविद्या पर शोधग्रन्थ “श्रीविद्या-रहस्यम्” के कारण उन्हे मानद् विद्यावाचस्पति (पीएचडी) एवं दशमहाविद्या पर वृहद शोध ग्रन्थ “महाविद्या-रत्नाकरः” के लिए मानद् विद्यासागर (डी.लिट्) सम्मान प्रदान किया गया था। इनकी रचनाओं को द्वारका-शारदा एवं बद्रीनाथ ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य द्वारा अनुमोदित भी किया गया है जिससे कई श्रद्धालुगण लाभान्वित होते आ रहे हैं। ये दोनों ग्रन्थ राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध और मान्यता प्राप्त हैं। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए श्री गौरहाजी ने बताया है कि इस शक्ति अनुष्ठान में काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, त्रिपुर-भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी एवं कमला का वैदिक एवं तान्न्त्रोक्त रीति से क्रम से अर्चन-पूजन- हवनादि कर्म सम्पन्न होंगे और अन्त में श्रीविद्या राजराजेश्वरी ललिता महात्रिपुरसुन्दरी का अनुष्ठान सम्पन्न होगा। ये सारी गतिविधियॉं राष्ट्र कल्याण और लोक कल्याण की भावना से संपादित होंगे। इस कार्य को सम्पन्न कराने की प्रेरणा उनके गुरुदेव प्रातः स्मरणीय पूज्य बर्फानी दादाजी महाराज से प्राप्त है जो कि कई वर्षों पूर्व अनुष्ठान स्थल जाकर स्वयं आश्रम प्रमुख माताजी को लिखित में आदेशित कर गए थे। बिलासपुर क्षेत्र से दश महाविद्या पर सांगोपांग जानकारी रखने वाले साधक और यहॉं के स्थानीय आचार्यों द्वारा इस कठिन कार्य को मध्यप्रदेश जाकर सम्पन्न कराया जाना क्षेत्र के लिए गौरव की बात है।

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