
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ शासन के ग्रामोद्योग विभाग एवं हाथकरघा संचालनालय के तत्वावधान में आयोजित कोसा एवं सूती हाथकरघा वस्त्र प्रदर्शनी सह-विक्रय का कल अंतिम दिन रहेगा। यह प्रदर्शनी 8 मार्च से 15 मार्च 2026 तक रायचंद रव सभा भवन, कंपनी गार्डन के पास बिलासपुर में आयोजित की गई है, जहां प्रदेश के विभिन्न जिलों के बुनकर अपने पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री कर रहे हैं।
प्रदेश में लगभग 50 हजार बुनकर हाथकरघा के माध्यम से वस्त्र उत्पादन कर अपनी आजीविका चला रहे हैं, जिनमें करीब 50 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। महिला बुनकरों द्वारा कोसा एवं सूती वस्त्रों में आकर्षक डिजाइन की साड़ियों सहित विभिन्न परिधानों का निर्माण किया जा रहा है। हाथकरघा उत्पादन से महिलाओं को घर पर ही रोजगार का अवसर मिल रहा है, जिससे वे घरेलू जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक रूप से भी सशक्त बन रही हैं।
ग्रामोद्योग विभाग की बाजार अध्ययन योजना के तहत इस प्रकार की प्रदर्शनियों का आयोजन जिला, संभाग, राज्य और राज्य के बाहर भी किया जाता है। इसका उद्देश्य बुनकरों के उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना, उनकी बुनाई कला को आम नागरिकों तक पहुंचाना और उपभोक्ताओं से मिले सुझावों के आधार पर नए डिजाइन विकसित करना है।
प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कोसा साड़ियां, सूट, जैकेट, कॉटन शर्टिंग-सूटिंग सहित कई आकर्षक उत्पाद उपलब्ध हैं, जिन्हें बिलासपुर के नागरिकों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है। गर्मी का मौसम शुरू होने के साथ सूती वस्त्रों जैसे सूती साड़ी, सलवार-सूट, ड्रेस मटेरियल और चादरों की मांग भी बढ़ रही है।
इस प्रदर्शनी में रायगढ़, जांजगीर-चांपा, बिलासपुर, चंद्रपुर, छुरी, सिवनी, लोफंदी और भिलाईगढ़ सहित विभिन्न क्षेत्रों के बुनकर समितियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया है। प्रदर्शनी के नोडल अधिकारी एवं उपसंचालक हाथकरघा डोमदास धकाते ने जानकारी देते हुए बताया कि यह प्रदर्शनी कल समाप्त हो जाएगी। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि अंतिम दिन प्रदर्शनी में पहुंचकर छत्तीसगढ़ की पारंपरिक बुनाई कला, हस्तशिल्प और खादी उत्पादों का अवलोकन कर बुनकरों को प्रोत्साहित करें।