बिलासपुर। राजकिशोर नगर स्थित ब्रह्माकुमारीज़ के शिव-अनुराग भवन में आयोजित “रामायण का आध्यात्मिक महत्व एवं जीवन प्रबंधन” श्रृंखला के सातवें दिन ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने हनुमान चरित्र एवं धन प्रबंधन पर सारगर्भित व्याख्यान दिया।
उन्होंने कहा कि “हनुमान” शब्द का वास्तविक अर्थ है—जिसने अपने ‘मान’ अर्थात् अहंकार का हनन कर दिया हो। हनुमान जी का जीवन भक्ति, सरलता, निष्ठा और पूर्ण समर्पण का अद्भुत उदाहरण है। आज मनुष्य धन के पीछे भागते हुए तनावग्रस्त हो रहा है, जबकि हनुमान जी के पास भक्ति का ऐसा अमूल्य धन था, जिसने उन्हें भगवान श्रीराम का प्रिय बना दिया।
सुंदरकांड के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि लंका आज की विकारी दुनिया का प्रतीक है, और सीता माता की खोज यह सिखाती है कि केवल शुद्ध और निष्कपट हृदय वाला व्यक्ति ही दुखी आत्माओं को परमात्मा से जोड़ सकता है।
मंजू दीदी ने धन प्रबंधन के संदर्भ में स्पष्ट किया कि धन को जीवन में “सेवक” बनाकर रखना चाहिए, न कि “मालिक”। उन्होंने कहा कि अधिक धन की लालसा तनाव को जन्म देती है, कर्ज मानसिक बोझ बनता है, जबकि संतोष, ईमानदारी और दान जीवन को सुखी एवं संतुलित बनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईमानदारी से कर भुगतान करने और भ्रष्टाचार से दूर रहने से व्यक्ति की प्रतिष्ठा स्वतः बढ़ती है।
हनुमान जी की समुद्र पार करने की यात्रा का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जीवन में लक्ष्य प्राप्ति के मार्ग में प्रलोभन देकर आलस्य में लाने वाला मैनाक , ईर्ष्या-अहंकार रूपी सुरसा और नफरत-नकारात्मकता रूपी सिंहिका जैसी बाधाएँ आती हैं, जिन्हें दृढ़ संकल्प और सकारात्मकता से पार करना आवश्यक है।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी को अपने भीतर के काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार रूपी रावण को समाप्त करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब आत्मा पूर्ण समर्पण के साथ परमात्मा से जुड़ती है, तब वह शक्तिशाली और निर्भय बन जाती है।
सत्र का समापन भजनों के साथ प्रसाद वितरण से हुआ।