बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में घर के वातावरण की सबसे बड़ी भूमिका – बीके स्वाति दीदी

02 मई 2026, बिलासपुर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, बिलासपुर की मुख्य शाखा, टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन में अभिभावकों के लिए आयोजित सात दिवसीय “पेरेंटिंग विथ वैल्यूज़” शिविर का शुभारंभ हुआ। यह शिविर आधुनिक समय में बच्चों की परवरिश से जुड़ी चुनौतियों को मूल्यों, समझ और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ सुलझाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।
शिविर के प्रथम दिवस पर सेवाकेंद्र संचालिका बीके स्वाति दीदी ने कहा कि आज के समय में जब बच्चों का बचपन तेज़ी से बदलते वातावरण, तकनीक, मोबाइल और प्रतिस्पर्धा के दबाव में आकार ले रहा है, तब माता-पिता की भूमिका केवल पालन-पोषण तक सीमित न रहकर संस्कार निर्माता की बन गई है। इसी गहरी आवश्यकता को समझते हुए यह सात दिवसीय शिविर अभिभावकों को यह सिखाने का प्रयास है कि कैसे वे स्वयं के विचार, व्यवहार और दृष्टिकोण के माध्यम से बच्चों के जीवन को सही दिशा दे सकते हैं। दीदी ने कहा कि पेरेंटिंग केवल बच्चों को अनुशासन सिखाने का नाम नहीं है, बल्कि स्वयं माता-पिता का संस्कारवान बनना ही सच्ची पेरेंटिंग है। बच्चे शब्दों से नहीं, बल्कि माता-पिता के व्यवहार, बोलचाल, प्रतिक्रिया और जीवनशैली से सीखते हैं। इसलिए यदि हम चाहते हैं कि बच्चे शांत, आत्मविश्वासी, सम्मानशील और जिम्मेदार बनें, तो सबसे पहले हमें स्वयं उन मूल्यों को जीवन में उतारना होगा।
दीदी ने बताया कि “पेरेंटिंग विथ वैल्यूज़” शिविर के सातों दिन अभिभावकों को अलग-अलग विषयों पर मार्गदर्शन दिया जाएगा। इसमें धैर्य, प्रेम, सकारात्मक सोच, आत्म-संयम, डिजिटल संतुलन और भावनात्मक समझ जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। शिविर का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि अभिभावकों के भीतर आत्मचिंतन और आत्मपरिवर्तन की प्रक्रिया को जागृत करना है।
आज के दौर में कई बार माता-पिता अनजाने में बच्चों पर अपनी अपेक्षाएँ थोप देते हैं, जिससे बच्चों में तनाव, डर और विद्रोह की भावना जन्म लेती है। इस शिविर के माध्यम से अभिभावकों को यह समझाया जा रहा है कि सकारात्मक बातचीत और स्नेहपूर्ण अनुशासन से ही बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव है। जब माता-पिता बच्चों की भावनाओं को समझते हैं, उन्हें सुनते हैं और सम्मान देते हैं, तब बच्चे भी स्वतः जिम्मेदार बनते हैं। घर का वातावरण बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है। यदि घर में शांति, सहयोग और सम्मान का माहौल हो, तो बच्चे वही संस्कार सहज रूप से ग्रहण करते हैं। इसी कारण “पेरेंटिंग विथ वैल्यूज़” शिविर में अभिभावकों को स्वयं की सोच, भाषा और प्रतिक्रिया पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

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