डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा की 98वीं जयंती सम्पन्न: अप्रकाशित रचनाओं के प्रकाशन और ‘कविराज’ की उपाधि पर बड़ा ऐलान

【साहित्यकार बसंत राघव सहित कई विभूतियां सम्मानित】

   बिलासपुर, विगत 17 मई 2026  

समन्वय साहित्य परिवार, छत्तीसगढ़ द्वारा प्रार्थना भवन, बिलासपुर में भारतीय संस्कृति के ध्वजवाहक, छत्तीसगढ़ी गद्य साहित्य के युगप्रवर्तक और भाषाविद डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा की 98वीं जयंती पर ‘डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा प्रसंग’ का गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी-हिंदी साहित्य और समाज के लिए डॉ. शर्मा के योगदान को स्मरण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य भाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने घोषणा की कि डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा की अप्रकाशित रचनाओं का प्रकाशन आयोग द्वारा किया जाएगा। संस्कृत विदुषी डॉ. पुष्पा दीक्षित ने पाणिनि शोध संस्थान की ओर से डॉ. शर्मा को ‘कविराज’ की उपाधि प्रदान करने की घोषणा की।  

 इस अवसर पर डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा रचित छत्तीसगढ़ का इतिहास एवं परंपरा: 'गुड़ी के गोठ ' का विमोचन हुआ। साथ ही डॉ. देवधर महंत द्वारा संपादित 'कीर्ति शेष: डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा', सरला शर्मा की 'रात जागा पाखी उवाच' और डॉ. बरसाइत दास महंत की 'महाभारत काल में नारी' का भी विमोचन किया गया।  

  साहित्यकारों और समाजसेवियों का सम्मान:  वरिष्ठ साहित्यकार एवं छत्तीसगढ़ी फिल्म अभिनेता विजय मिश्रा 'अमित', महेंद्र कुमार जैन, डॉ. उषा किरण बाजपेई, सरला शर्मा, शशि दुबे और डॉ. बेला महंत, शास्त्रीय गायिका सुश्री श्रुति प्रभला, बृजेश श्रीवास्तव, कवि किशोर तिवारी, किशोर सेतपाल, दिनेश कुमार चतुर्वेदी, बजरंग केडिया, जयश्री शुक्ला, साहित्यकार बसंत राघव, वरिष्ठ कवि राजेश चौहान तथा सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (गोडपारा)  का  सम्मान किया गया।  

  कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के पूर्व प्रोफेसर एवं साहित्य भाषा अध्ययनशाला के पूर्व अध्यक्ष डॉ. चितरंजन कर ने कहा कि डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा भाषा-विद, साहित्यकार, अनुवादक, समीक्षक, चिंतक और शिक्षक थे। डॉ. कर ने कहा कि यह आयोजन डॉ. शर्मा की जन्म शताब्दी समारोह 2028 का पूर्वाभ्यास है।  

   मुख्य अतिथि प्रभात मिश्रा ने कहा कि डॉ. शर्मा छत्तीसगढ़ के गौरव हैं। छत्तीसगढ़ी भाषा हमारी अस्मिता की पहचान है। उन्होंने बताया कि आयोग द्वारा डॉ. शर्मा को समर्पित जिला सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे और उनकी अप्रकाशित पांडुलिपियों का प्रकाशन किया जाएगा।  

  विशिष्ट अतिथि डॉ. पुष्पा दीक्षित ने कहा कि डॉ. शर्मा की रचनाएँ ही उनकी पहचान हैं। डॉ. अजय पाठक ने उन्हें किसान हितैषी और स्वाभिमानी साहित्यकार बताया। साहित्यकार सरला शर्मा ने कहा कि डॉ. शर्मा व्यष्टि से समष्टि की चेतना के पर्याय थे। छत्तीसगढ़ विधानसभा के सचिव दिनेश शर्मा और पूर्व विधायक चंद्रप्रकाश वाजपेई ने भी उनके संस्मरण साझा कर योगदान को याद किया।  

  कार्यक्रम की शुरुआत में समन्वय साहित्य परिवार, छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष डॉ. देवधर महंत ने स्वागत भाषण में डॉ. शर्मा के जीवन और रचनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 2028 में उनकी जन्म शताब्दी समारोह सामूहिक रूप से मनाया जाएगा।  

    आभार प्रदर्शन समन्वय साहित्य परिवार, बिलासपुर के केंद्राध्यक्ष डॉ. गंगाधर पटेल ‘पुष्कर’ ने किया। कार्यक्रम का संचालन विजय मिश्रा अमित और कवि किशोर तिवारी ने किया।  

 कार्यक्रम में डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा के परिजन, शहर के गणमान्य नागरिक, प्रबुद्धजन और बड़ी संख्या में साहित्यकार उपस्थित रहे।

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