
बिलासपुर। राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संगीत एवं नृत्य महोत्सव ‘नाद मंजरी सीजन-3’ की सफल आयोजन के उपरांत समीक्षा एवं आगामी रूपरेखा निर्धारित करने हेतु एक विशेष समीक्षा गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में आयोजन की उपलब्धियों, प्रतिभागियों की प्रतिक्रियाओं, प्रबंधन व्यवस्थाओं तथा आगामी संस्करण को और अधिक भव्य, सुव्यवस्थित एवं राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में आयोजन के मुख्य संयोजक पंकज खंडेलवाल एवं मयूरी खंडेलवाल ने नाद मंजरी सीजन-3 की सफलता का श्रेय देशभर से पधारे कलाकारों, निर्णायक मंडल, अतिथियों, स्वयंसेवकों, सहयोगी संस्थाओं एवं दर्शकों को देते हुए कहा कि नाद मंजरी अब केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भारतीय संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने वाला एक सशक्त अभियान बन चुका है।
गोष्ठी में थावे विद्यापीठ के कुलपति विनय कुमार पाठक, न्यायमूर्ति चन्द्र भूषण बाजपेयी, अंतरराष्ट्रीय नृत्य गुरु रिमझिम सोनी, आशुतोष सोनी, संगीत गुरु रमाकांत त्रिपाठी, रमेश चंद्र श्रीवास्तव, विष्णु तिवारी, महासचिव सुरेन्द्र वर्मा, दीपक, तरुण मिश्रा, जितेंद्र सिंह ठाकुर, परमवीर मरहास एवं दिलीप सराफ सहित आयोजन समिति के सदस्यों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए।
वक्ताओं ने कहा कि नाद मंजरी ने देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का गरिमामय मंच उपलब्ध कराया है। प्रतियोगिता की पारदर्शी निर्णायक प्रक्रिया, अनुशासित आयोजन और सांस्कृतिक गरिमा की सभी ने मुक्तकंठ से सराहना की। साथ ही यह प्रस्ताव भी रखा गया कि अगले सीजन में और अधिक राज्यों की सहभागिता, नई प्रतियोगिता श्रेणियों का समावेश, अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की भागीदारी तथा तकनीकी रूप से और आधुनिक आयोजन सुनिश्चित किया जाए।
गोष्ठी के दौरान आयोजन को सफल बनाने में उल्लेखनीय योगदान देने वाले थावे विद्यापीठ के कुलपति विनय कुमार पाठक, न्यायमूर्ति चन्द्र भूषण बाजपेयी, नृत्य गुरु रिमझिम सोनी, आशुतोष सोनी, संगीत गुरु रमाकांत त्रिपाठी, रमेश चंद्र श्रीवास्तव, विष्णु तिवारी, महासचिव सुरेन्द्र वर्मा, दीपक, तरुण मिश्रा, जितेंद्र सिंह ठाकुर, परमवीर मरहास एवं दिलीप सराफ का शॉल, श्रीफल एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मान किया गया। उपस्थित जनों ने सभी सम्मानित अतिथियों के योगदान की सराहना करते हुए उनका अभिनंदन किया।
बैठक में आयोजन के प्रत्येक विभाग की विस्तृत समीक्षा करते हुए सफल संचालन में योगदान देने वाले सभी पदाधिकारियों, स्वयंसेवकों और सहयोगियों का विशेष आभार व्यक्त किया गया। उपस्थित सभी सदस्यों ने एकमत होकर संकल्प लिया कि ‘नाद मंजरी सीजन-4’ को और अधिक विराट, भव्य एवं ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया जाएगा, जिससे यह आयोजन राष्ट्रीय ही नहीं, अपितु अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मंच पर भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर सके।
समीक्षा गोष्ठी सकारात्मक सुझावों, नवाचारों और आगामी योजनाओं के साथ संपन्न हुई तथा सभी सदस्यों ने भारतीय कला एवं संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प दोहराया।