सेंट अगस्टीन चर्च ने CNI छत्तीसगढ़ डायसिस से तोड़ा नाता, कोषाध्यक्ष पर वित्तीय अनियमितता के आरोपपदाधिकारियों ने कहा- पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए लिया फैसला, पादरियों को वेतन नहीं, अंशदान का हिसाब नहीं; डायसिस का पक्ष आना बाकी

बिलासपुर: शहर के ऐतिहासिक सेंट अगस्टीन चर्च ने शनिवार को छत्तीसगढ़ डायसिस (CNI) से अलग होकर स्वतंत्र संचालन की घोषणा की। प्रेसवार्ता में चर्च प्रबंधन ने डायसिस प्रशासन और कोषाध्यक्ष जयदीप रॉबिन्सन पर वित्तीय अनियमितता, मनमानी और नियमों के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए।

चर्च पदाधिकारी पिंकी सिंह, महिमा टोपनो, शबनम इनोक्स, आलोक जकारिया, टीना सैमुअल और प्रभाकर सिंह ने कहा कि यह निर्णय चर्च प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमों के पालन के लिए लिया गया है।

कोषाध्यक्ष पर आरोप:
चर्च प्रबंधन ने बताया कि सेंट अगस्टीन चर्च के प्रतिनिधि के रूप में डायसिस काउंसिल में भेजे गए जयदीप रॉबिन्सन को कोषाध्यक्ष का पद मिला था। आरोप है कि उन्होंने पद का मनमाने ढंग से उपयोग किया। अब चर्च ने उन्हें अपना प्रतिनिधि मानने से इनकार करते हुए मान्यता समाप्त कर दी है। प्रबंधन का दावा है कि इससे डायसिस में उनका कोषाध्यक्ष पद भी स्वतः समाप्त हो जाना चाहिए।

डायसिस प्रशासन पर लगाए गए आरोप:

  1. अंशदान का हिसाब नहीं: चर्चों से मिलने वाले अंशदान का ब्यौरा उपलब्ध नहीं कराया जाता।
  2. पादरियों का वेतन लंबित: कई पादरियों को महीनों से वेतन नहीं मिला है।
  3. नियम विरुद्ध तबादले: पादरियों के स्थानांतरण निर्धारित नियमों के विपरीत किए जाते हैं।
  4. विरोध पर कार्रवाई: असहमति जताने वालों का निलंबन, सेवा समाप्ति और सामाजिक बहिष्कार किया जाता है।
  5. संपत्तियों का दुरुपयोग: मिशन की संपत्तियों और निधियों के दुरुपयोग के आरोप हैं।

पदाधिकारियों ने कहा कि इन आरोपों से संबंधित दस्तावेज उनके पास उपलब्ध हैं और आवश्यकता पड़ने पर जांच एजेंसियों को सौंपे जाएंगे।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
सेंट अगस्टीन चर्च वर्ष 1907 में ब्रिटिश काल में स्थापित एंग्लिकन चर्च है। यह रेलवे की भूमि पर स्थित है। चर्च का दावा है कि यह अहस्तांतरणीय है और इसकी संपत्ति का हस्तांतरण नहीं किया जा सकता।

चर्च प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय किसी धार्मिक मतभेद से जुड़ा नहीं है। यह केवल प्रशासनिक सुधार की मांग है। अब सेंट अगस्टीन चर्च अपनी एंग्लिकन परंपरा के अनुसार स्वतंत्र रूप से धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों का संचालन करेगा!

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