गारंटी या जुमला? 72 हजार मितानिन दीदियों की सरकार को दो टूक – नियमित करो, वरना संग्राम

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ कही जाने वाली 72 हजार मितानिन दीदियों और 3,250 मितानिन प्रशिक्षकों ने सरकार के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। मितानिन संघ ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सरकार पर “मोदी की गारंटी” के नाम पर वादा-खिलाफी का सीधा आरोप लगाया है।

संघ का कहना है कि भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में मितानिन कार्यक्रम को ठेका प्रथा से मुक्त कर नियमित करने का वादा किया था। सरकार बने 18 महीने बीत चुके हैं, लेकिन नियमितीकरण की फाइल धूल फांक रही है। आज भी पूरा कार्यक्रम ठेकेदारों के हवाले है, जिससे न रोजगार सुरक्षित है, न सम्मान

गांव-गांव में गर्भवती माताओं, नवजात शिशुओं और बुजुर्गों की दिन-रात सेवा करने वाली ये दीदियां खुद भविष्य की असुरक्षा में जी रही हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के हजारों कर्मचारी नियमित हैं, फिर 72 हजार मितानिनों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों?

मितानिन संघ का अल्टीमेटम:

  1. 30 दिन के भीतर ठेका प्रथा समाप्त कर पूर्ण नियमितीकरण किया जाए।
  2. NHM की तर्ज पर सभी मितानिनों-प्रशिक्षकों को नियमित वेतनमान दिया जाए।
  3. वादा पूरा नहीं हुआ तो प्रदेशव्यापी चक्काजाम और विधानसभा घेराव होगा।

संघ ने सवाल उठाया – “जिस सरकार ने ‘मोदी की गारंटी’ दी, वही गारंटी तोड़ रही है। स्वास्थ्य की रीढ़ तोड़कर स्वस्थ छत्तीसगढ़ कैसे बनेगा?”

फिलहाल सरकार की ओर से सन्नाटा है। अब देखना है कि सरकार गारंटी निभाती है या मितानिन दीदियों को सड़क पर उतरने पर मजबूर करती है।

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