बिलासपुर: “मानसिक रोगों का इलाज सिर्फ दवा नहीं, संवेदना और संवाद है” – डॉ. दिलीप कुमार दास

बिलासपुर। अपोलो हॉस्पिटल के वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ एवं ख्यातिलब्ध साहित्यकार डॉ. दिलीप कुमार दास ने स्पष्ट किया कि मानसिक रोगों के उपचार में दवाइयाँ अकेली पर्याप्त नहीं हैं। मरीज के साथ आत्मीय संवाद, पर्याप्त समय, गहन काउंसलिंग और साइकोथेरेपी ही उपचार की रीढ़ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समाज में जागरूकता ही अवसाद, तनाव और अन्य मानसिक विकारों से बचाव का सबसे बड़ा माध्यम है।

बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकारवार्ता में डॉ. दास ने अपने 29 वर्षों के अनुभव साझा किए। वर्ष 1998 में दिल्ली में चार साल की सेवाओं के बाद उन्होंने रायपुर के एमएमआई हॉस्पिटल से छत्तीसगढ़ में अपनी यात्रा शुरू की और वर्ष 2001 से अपोलो हॉस्पिटल से जुड़े हैं। अब तक वे बस्तर के नक्सल प्रभावित इलाकों से लेकर सरायपाली, बसना, अंबिकापुर, मनेन्द्रगढ़ और विश्रामपुर तक 350 से अधिक निःशुल्क मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता शिविर आयोजित कर चुके हैं।

वर्तमान में डॉ. दास प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक अपोलो हॉस्पिटल में मरीजों को देखते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए वे अपने निजी क्लिनिक में रियायती दर पर उपचार उपलब्ध कराते हैं। पिछले पाँच वर्षों से उनके निजी क्लिनिक में आने वाले लगभग 50 प्रतिशत मरीजों को निःशुल्क ओपीडी परामर्श दिया जा रहा है।

“इलाज में 70% भूमिका काउंसलिंग की”
डॉ. दास के अनुसार, मनोरोग चिकित्सा में दवाइयों का योगदान मात्र 25-30 प्रतिशत है, जबकि 70 प्रतिशत सफलता काउंसलिंग, साइकोथेरेपी और मानवीय स्पर्श पर निर्भर करती है। वे मरीजों को केवल प्रिस्क्रिप्शन नहीं देते, बल्कि साहित्य, प्रेरक प्रसंग, संतों की वाणी, कविताओं और सकारात्मक संवाद के जरिए उन्हें मानसिक रूप से सशक्त बनाते हैं।

“मानसिक रोगी के इलाज में ‘ह्यूमन टच’ सबसे अहम है। डॉक्टर-मरीज के बीच विश्वास और आत्मीयता का रिश्ता ही दवा से ज्यादा असर करता है,” डॉ. दास ने कहा। यही वजह है कि वे प्रत्येक नए मरीज को लगभग एक घंटा देते हैं और पुराने मरीजों को भी आवश्यकता अनुसार विस्तृत परामर्श देते हैं।

अब तक चार लाख से अधिक मरीजों का परामर्श कर चुके डॉ. दास का दावा है कि उचित उपचार, निरंतर काउंसलिंग और मरीज के सहयोग से उनके करीब 90 प्रतिशत मरीज पूर्णतः स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रहे हैं।

पुस्तकों का विमोचन, मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान
पत्रकारवार्ता के दौरान डॉ. दिलीप कुमार दास की लिखी पुस्तकों का विमोचन बिलासपुर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों द्वारा किया गया। प्रेस क्लब सचिव संदीप करिहार, उपाध्यक्ष विजय क्रांति तिवारी, कोषाध्यक्ष किशोर कुमार सिंह, सह-सचिव हरिकिशन गंगवानी तथा कार्यकारिणी सदस्य कैलाश यादव ने संयुक्त रूप से पुस्तकों का विमोचन किया। उपस्थित पत्रकारों ने डॉ. दास के साहित्यिक योगदान और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान की मुक्त कंठ से सराहना की।

डॉ. दास ने अपनी संघर्षपूर्ण जीवन यात्रा, 350 से अधिक निःशुल्क मेंटल हेल्थ अवेयरनेस कैंप के अनुभव, चार लाख मरीजों के परामर्श तथा अपनी नई पुस्तक के विमोचन की जानकारी दी। साथ ही बताया कि आगामी 6 दिसंबर को हैदराबाद में उन्हें प्रतिष्ठित ‘रेफरेंस बुक ऑफ द ईयर’ सम्मान से नवाजा जाएगा।

उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। समय पर सही परामर्श और उपचार मिल जाए तो अधिकांश मानसिक रोग पूरी तरह ठीक हो सकते हैं।

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