
पं. सुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय में नशामुक्ति व आत्मबल विषय पर कार्यशाला, एनएसएस स्वयंसेवकों व विश्वविद्यालय स्टाफ ने लिया नशामुक्त भारत का संकल्प

बिलासपुर। पंडित सुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय, बिलासपुर के मनोविज्ञान एवं योग विज्ञान विभाग द्वारा ‘युवा शक्ति–आत्मबल एवं नशामुक्ति’ विषय पर विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के स्वयंसेवकों, विद्यार्थियों एवं विश्वविद्यालय के अधिकारी-कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने कहा कि नशे से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम आत्मबल है। जब युवा अपने मन, विचारों और संकल्पों पर नियंत्रण करना सीख लेते हैं, तब वे किसी भी प्रकार के व्यसन और नकारात्मक प्रवृत्तियों से स्वयं को सुरक्षित रख सकते हैं। उन्होंने राजयोग मेडिटेशन को मानसिक शक्ति, आत्मविश्वास और सकारात्मक जीवनशैली का सशक्त आधार बताते हुए युवाओं से स्वयं नशामुक्त रहने तथा समाज को भी इस दिशा में प्रेरित करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. वीरेन्द्र कुमार सारस्वत ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करना भी है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी यदि नशे से दूर रहकर अपने व्यक्तित्व का विकास करेगी तो विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य शीघ्र साकार होगा।
कार्यक्रम में कुलपति के साथ एनएसएस के स्वयंसेवक, विश्वविद्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। अंत में सभी ने नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का संचालन मनोविज्ञान एवं योग विज्ञान विभाग द्वारा किया गया।