10 सितम्बर 2026, बिलासपुर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय बिलासपुर की मुख्य शाखा टेलीफोन एक्सचेंज रोड़ स्थित राजयोग भवन में ‘विश्व आत्महत्या निषेध दिवस’ के अवसर पर सेवाकेंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी स्वाति दीदी ने समाज में तेजी से बढ़ रहे मानसिक तनाव, डिप्रेशन और बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्तियों के कारण एवं उनके स्थायी निवारण पर विस्तार से प्रकाश डाला।
ब्रह्माकुमारी स्वाति दीदी ने कहा कि आज के दौर में आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण अत्यधिक मानसिक तनाव, असफलताओं का डर, रिश्तों में बढ़ता बिखराव और खुद से व दूसरों से बहुत ज्यादा अपेक्षाएं रखना है। तकनीक और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग के कारण परिवारों में आपसी संवाद खत्म होता जा रहा है। लोग वर्चुअल दुनिया में तो हजारों दोस्तों से जुड़े हैं, लेकिन असल जिंदगी में वे अकेलेपन का शिकार हैं। दीदी ने कहा, जब व्यक्ति अपने मन की बात, अपनी विफलताएं या अपनी परेशानियां किसी से साझा नहीं कर पाता, तो वह गहरे अवसाद में चला जाता है। जब व्यक्ति आंतरिक रूप से अकेला और कमजोर महसूस करता है, तो वह परिस्थितियों का सामना करने के बजाय जीवन को समाप्त करने जैसा आत्मघाती कदम उठा लेता है। लेकिन आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि यह जीवन की सबसे बड़ी हार है।
आज का युवा वर्ग छोटी-छोटी असफलताओं, जैसे परीक्षा में कम अंक आना, नौकरी का न मिलना या रिश्तों में आने वाले उतार-चढ़ाव को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है। सहनशीलता की इस कमी को दूर करने के लिए समाज और परिवार दोनों को आगे आना होगा।
निवारण के लिए स्वाति दीदी ने व्यावहारिक उपाय बताए –
पारिवारिक संवाद बढ़ाएं – माता-पिता अपने बच्चों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताएं और उनके व्यवहार में आ रहे बदलावों जैसे अचानक शांत हो जाना या चिड़चिड़ा होना को पहचानें।
सफलता का दबाव कम करें- समाज को युवाओं पर हर क्षेत्र में परफेक्ट होने का मानसिक दबाव बनाना बंद करना होगा। असफलताओं को भी जीवन के एक हिस्से के रूप में स्वीकार करना सीखें।
बिना किसी झिझक के मदद लें – यदि कोई व्यक्ति मानसिक रूप से परेशान है, तो उसे समाज के डर से छिपने के बजाय तुरंत मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों या आध्यात्मिक संस्थाओं से संपर्क करना चाहिए।
मानसिक मजबूती के लिए राजयोग का महत्व
दीदी ने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में आध्यात्मिक दृष्टिकोण को जोड़ने की बात कही। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन कुछ समय का राजयोग अभ्यास और सकारात्मक चिंतन मन को आंतरिक शक्ति देता है। राजयोग के चमत्कारी प्रभावों के बारे में बताते हुए दीदी ने कहा कि जो व्यक्ति नियमित रूप से राजयोग का अभ्यास करता है, उसके जीवन में अद्भुत सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलते हैं। राजयोग मनुष्य के सोचने के तरीके को बदल देता है। विपरीत परिस्थितियों में भी व्यक्ति निराश होने के बजाय सकारात्मक रास्ता खोजने लगता है। निरंतर ध्यान से मन के व्यर्थ और नकारात्मक विचार समाप्त हो जाते हैं, जिससे आंतरिक शांति की अनुभूति होती है और कार्यक्षमता बढ़ती है।