

15 अक्टूबर 2026, बिलासपुर। क्रोध किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। जब हम क्रोध में होते हैं, तो हमारी सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित हो सकती है और कई बार हम ऐसे शब्दों या व्यवहार का सहारा ले लेते हैं, जिनका बाद में पछतावा होता है। वास्तविक शक्ति दूसरों पर अपना प्रभाव दिखाने में नहीं, बल्कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में स्वयं के मन, विचारों और प्रतिक्रियाओं को संतुलित रखने में है। यह प्रेरणादायी विचार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, बिलासपुर के टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित मुख्य सेवाकेंद्र राजयोग भवन की संचालिका बीके स्वाति दीदी ने पुलिस लाइन स्थित चेतना हॉल में आयोजित रेंज स्तरीय रिफ्रेशर कोर्स के पंचम बैच की कार्यशाला में व्यक्त किए। कार्यशाला का विषय तनाव प्रबंधन एवं मानसिक स्वास्थ्य के अंतर्गत रहा।
बीके स्वाति दीदी ने पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस सेवा में अनेक बार ऐसी परिस्थितियां सामने आती हैं, जहां धैर्य, संयम और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने, लोगों की समस्याओं को सुनने तथा तनावपूर्ण परिस्थितियों का सामना करने के दौरान मानसिक संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। ऐसे में क्रोध पर नियंत्रण और भावनात्मक संतुलन व्यक्ति के व्यक्तित्व एवं कार्यशैली के महत्वपूर्ण अंग हैं।
उन्होंने समझाया कि क्रोध आने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे अत्यधिक कार्यभार, थकान, बाहरी दबाव अथवा परिस्थितियों को अपने अनुसार न बदल पाना। जब व्यक्ति इन कारणों को पहचानना सीखता है, तो वह क्रोध की प्रतिक्रिया देने से पहले स्वयं को संभाल सकता है। उन्होंने कहा कि परिस्थिति पर प्रतिक्रिया देने से पहले कुछ क्षण रुकना और शांत मन से सोचना क्रोध प्रबंधन की दिशा में एक प्रभावी अभ्यास हो सकता है।
बीके स्वाति दीदी ने अधिकारियों को प्रेरित किया कि वे किसी भी परिस्थिति में प्रतिक्रिया देने से पहले स्वयं से यह प्रश्न करें कि क्या मेरे शब्द और व्यवहार समस्या को सुलझाएंगे या उसे और बढ़ाएंगे। सकारात्मक संवाद, धैर्यपूर्वक सुनना, सहकर्मियों के प्रति सम्मान और दूसरों के दृष्टिकोण को समझने का प्रयास क्रोध को कम करने में सहायक हो सकता है।
उन्होंने आत्मचिंतन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नियमित रूप से कुछ समय स्वयं के लिए निकालना, अपने विचारों का निरीक्षण करना और मन को सकारात्मक संकल्पों से जोड़ना आंतरिक शक्ति विकसित करने में सहायक हो सकता है। उन्होंने बताया कि सच्चा आत्मानुशासन वही है, जिसमें व्यक्ति परिस्थिति के दबाव में भी अपने व्यवहार की गरिमा बनाए रखे। पुलिस अधिकारी का संयमित व्यवहार न केवल उसके व्यक्तित्व को प्रभावशाली बनाता है, बल्कि नागरिकों के साथ संवाद और कार्यस्थल के वातावरण को भी सकारात्मक दिशा दे सकता है।
यह कार्यशाला बिलासपुर रेंज पुलिस विभाग द्वारा आयोजित रेंज स्तरीय रिफ्रेशर कोर्स के अंतर्गत आयोजित की गई। इसमें रेंज के आठ जिलों—बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सारंगढ़-बिलाईगढ़ एवं सक्ती—से पुलिस अधिकारी विभिन्न प्रशिक्षण सत्रों में सहभागिता कर रहे हैं।
यह तीन दिवसीय रेंज स्तरीय रिफ्रेशर कोर्स पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) माननीय भ्राता रामगोपाल गर्ग जी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) माननीय भ्राता रजनीश सिंह जी एवं एएसपी मधुलिका सिंह जी के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम को सफल बनाने में ब्रह्माकुमारीज बिलासपुर की बीके संतोषी दीदी एवं डॉ. कमल छाबड़ा भाई जी का विशेष सहयोग रहा।