चेतना विरुद्ध महिला एवं बाल अपराध विषय पर कार्ययोजना

परिवार को बिखरने से बचाना पहली प्राथमिकता, पर कानून की जानकारी आवश्यक: बीके मंजू

बिलासपुरः बिलासपुर पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के नेतृत्व में चल रहे चेतना अभियान के अंतर्गत विगत 2 अगस्त को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात नीरज चंद्राकर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश कश्यप, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं महिला उत्पीड़न मामलो के प्रभारी गरिमा द्विवेदी द्वारा चेतना अभियान के तृतीय चरण के मुख्य बिंदुओ पर प्रकाश डाला गया।
इस बैठक में चर्चा करने एवं सुझाव हेतु विभिन्न समाज सेवी संस्थाओ, गणमान्य नागरिको, विद्यार्थियों की उपस्थिति रही ।

आज प्रभु दर्शन भवन टिकरापारा के हार्मनी हाल मे इस बैठक मे दिये दिशा निर्देशों को संस्था के सदस्यों के मध्य साझा करते मंजू दीदी ने कहा कि चेतना अभियान का तृतीय चरण महिला एवं बाल उत्पीड़न रोकने की दिशा मे जनजागृति पैदा करना है। हमारा मुख्य उद्देश्य परिवार को टूटने से बचाना है। लेकिन उत्पीड़न अगर मर्यादा को लांघे तब स्वाभिमान की रक्षा के लिये महिलाओं को कानूनी अधिकारो की जानकारी भी जरूरी है।

महिला उत्पीड़न मामलो की प्रभारी गरिमा द्विवेदी के अनुसार नये न्याय संहिता मे महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के हित मे बहुत कडे प्रावधान है जिसकी जानकारी अगर सही रूप मे लोगों तक पहुंचे तो अपराध के पूर्व सचेत हो जायेंगे और पश्चाताप से बच जायेंगे।
उमेश कश्यप के सुझावों को साझा करते दीदी ने कहा कि अपराध की सूचना मे सही जानकारी देने पर ही असली अपराधी को दंड मिल सकता है। अनावश्यक रूप से निर्दोषो को फसाने की कोशिश मे असली अपराधी के छूटने की संभावना बढ जाती है।

नीरज चंद्राकर की बातो को आगे बढाते दीदी ने कहा कि हमे इस बात का विशेष ध्यान रखना है कि किसी परिवार की निजता का हनन न हो। इसके लिये जरूरतमंद के बीच एक भरोसा कायम करना होगा जिससे उनकी समस्या के समाधान मे हम उनके और पुलिस के बीच माध्यम बन सके। क्योंकि एक बार प्रकरण दर्ज होने पर परिवार मे बिखराव निश्चित है, क्योंकि न्यायालय अपराध की सजा दे सकता है संस्कार परिवर्तन स्वयं के हाथ मे है।

मंजू दीदी ने कहा कि जैसे ही कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्राप्त होगी ब्रह्माकुमारी संस्था के भाई बहन इस कार्य मे भरपूर सहयोग करेंगे।

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