
नगर के चिंतक-साहित्यक लेंगे भाग
बिलासपुर/अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद बिलासपुर की “विकलांग-विमर्श”-विषयक 15 वीं राष्ट्रीय संगोष्ठी शिवाजी विश्वविद्यालय कोल्हापुर( महाराष्ट्र) में आयोजित की गई है।
उक्त की जानकारी देते हुए अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.विनय कुमार पाठक ने बताया कि 3 एवम 4 जनवरी 2025को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में समन्वित रूप से संचालित होगी जिसमें “विकलांग विमर्श के निकष पर भाषा और साहित्य”-विषय पर देश के भाषाविद,विमर्षक,समीक्षक, शोधक और समाज चिंतक शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे, जिन्हें आयोजन के बाद पुस्तकाकार प्रकाशित भी किया जाएगा।
द्विभाषिक इस राष्ट्रीय संगोष्ठी की तैयारी पूरी कर ली गई है। जिसमें प्रमुख संरक्षक माननीय कुलपति डॉ.डी.टी.शिर्के,संरक्षक सम कुलपति डॉ.पी.एस. पाटिल,कुलसचिव डॉ.व्ही.एन. शिंदे,वित्त एवं लेखाधिकारी श्रीमती एस.एस.पाटिल संयोजक डॉ.मनोहर एस.वासवानी के साथ डॉ.पी.वी. माने अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. टी,के.कारेकट्टी हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ.सी.ए.लंगारे,डॉ.आर.जी.वारवे
कर, डॉ.डी. एच,भादले, डॉ.एस. एस.सावंत प्रभारी प्राचार्य विलिंटन कॉलेज सांगली के साथ अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद की ओर से कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार पाठक,राष्ट्रीय महामंत्री मदन मोहन अग्रवाल, राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ.सुरेश माहेश्वरी,अमलनेर, संस्थापक सदस्य न्यायमूर्ति डॉ.चंद्र भूषण वाजपेयी, संरक्षक सदस्य विष्णु कुमार तिवारी,दीनदयाल यादव, बालगोविंद अग्रवाल के समन्वयन में यह संगोष्ठी संचालित होगी।
डॉ.पाठक ने आगे बताया कि इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में कुछ विद्वान ऑनलाइन भी जुड़ेंगे तथाd अभी तक दस राज्यों के विद्वानों की स्वीकृति मिल चुकी है।इसी भांति “विकलांग- विमर्श:दशा और दिशा”-विमर्श की आचरण संहिता का बंगाली और मराठी में अनुवाद हो जाना तथा पूरे देश में तद विषयक शोध का होना, इस विमर्श को इक्कीसवीं सदी का प्रमुख विमर्श प्रमाणित करता है।