
रायपुर, 30 मई 2026।
कान्यकुब्ज सभा शिक्षा मंडल एवं छत्तीसगढ़ मित्र मंडल के संयुक्त तत्वावधान में हिंदुस्तान के प्रथम हिंदी समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’ के प्रकाशन के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आज सायं 6 बजे एक विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हिंदी पत्रकारिता की दो शताब्दियों की गौरवपूर्ण यात्रा, उसके संघर्ष, विकास और वर्तमान स्वरूप पर विस्तृत चर्चा की गई। स्वागत भाषण अध्यक्ष सुरेश मिश्रा ने दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश के खंडवा से पधारे प्रख्यात साहित्यकार एवं चिंतक डॉ. श्रीराम परिहार थे, जबकि अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सुशील त्रिवेदी ने की। विशिष्ट अतिथियों के रूप में कान्यकुब्ज सभा शिक्षा मंडल के पूर्व अध्यक्ष श्री वीरेंद्र पाण्डेय, छत्तीसगढ़ हिंदी ग्रंथ अकादमी के अध्यक्ष डॉ. प्रभात मिश्रा, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. शशांक शर्मा, इतिहासकार डॉ. रविन्द्र मिश्रा, छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयुक्त डॉ. श्रीचंद मिश्रा तथा वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सुधीर शर्मा उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. सुशील त्रिवेदी ने हिंदी पत्रकारिता की परंपरा एवं उसके सामाजिक दायित्वों पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता डॉ. श्रीराम परिहार ने ‘उदन्त मार्तण्ड’ से लेकर वर्तमान डिजिटल पत्रकारिता तक की 200 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा का विस्तृत एवं तथ्यपरक विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार विभिन्न कालखंडों में हिंदी पत्रकारिता ने समाज जागरण, राष्ट्रीय चेतना तथा जनमत निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विशिष्ट वक्ता डॉ. शशांक शर्मा ने हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्षों को चार अलग-अलग 50-50 वर्षों के कालखंडों में विभाजित कर उसकी उपलब्धियों, चुनौतियों एवं विकासक्रम का विश्लेषणात्मक विवेचन किया। उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने समय-समय पर सामाजिक परिवर्तन और लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। 30 मई 1826 जेष्ठ कृष्ण पक्ष द्वितीया को महर्षि नारद जयंती थी दिन मंगलवार था।
कार्यक्रम का सफल संचालन श्री अजय अवस्थी ने किया तथा आभार प्रदर्शन कान्यकुब्ज सभा शिक्षा मंडल के सचिव श्री राजकुमार दीक्षित ने किया।
इस अवसर पर समाज के अध्यक्ष सुरेश मिश्रा, सचिव राज कुमार दीक्षित, उपाध्यक्ष संजय अवस्थी, सहसचिव प्रमोद कुमार मिश्रा, सहसचिव अनुराग पाण्डेय, डॉ श्रीराम परिहार मुख्य अतिथि, कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री शशांक शर्मा, विशिष्ट अतिथि डॉ सुशील त्रिवेदी, श्री गिरीश पंकज, शिरीष मिश्रा, प्रभात मिश्रा अध्यक्ष छग राजभाषा आयोग, डॉ रामेंद्र नाथ मिश्रा साहित्यकार, पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र पाण्डे, डॉ जे के डागर, डॉ सुधीर शर्मा, प्रकाश चंद्र होता, मधुकर द्विवेदी, विजय मिश्रा अमित, श्रीमती शकुंतला तिवारी, गिरजा शंकर दीक्षित, शशिकांत मिश्रा,जयशंकर तिवारी, संगम तिवारी, राघवेंद्र पाठक, आशीष बाजपेयी, प्रभात पाण्डेय, राजकुमार अवस्थी, राम कुमार शुक्ला, कार्यक्रम का संचालन अजय अवस्थी किरण’, जसवंत क्लाडियस, विदोष कुमार द्विवेदी, डॉ माणिक विश्वकर्मा नवरंग, डॉ उदयभान सिंह चौहान, कृष्णा प्रजापति, श्रीमती प्रीति मिश्रा, श्रीमती राधा तिवारी, डॉ मीनाक्षी बाजपेई, श्रीमती श्रद्धा पाठक, श्रीमती उन्नति शुक्ला, श्रीमती चन्द्रप्रभा दुबे, श्रीमती सीमा अवस्थी, श्रीमती सपना तिवारी, आर के दीक्षित, राम शंकर दुबे, नरेश दीक्षित, श्रवण यदु, एस एस त्रिवेदी, सत्यदेव तिवारी, आनंद मिश्रा, देवेंद्र पाठक, रज्जन अग्निहोत्री, राजेश त्रिवेदी, मोहन कुमार दुबे, राकेश कुमार तिवारी, डॉ देवेंद्र पाठक, डॉ स्नेहलता पाठक, प्रदीप जैन, राजेंद्र ओझा, डॉ मृणाविका, भास्कर किन्हेकर, प्रदीप श्रीवास्तव, आकाश परसाई, नितिन कुमार झा, श्रवण कुमार यदु, चंद्रिका शंकर बाजपेई, निश्चय बाजपेई, सचिन कुमार गुप्ता दैनिक भास्कर सहित बड़ी संख्या में साहित्य, पत्रकारिता एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने ‘उदन्त मार्तण्ड’ के 200 वर्ष पूर्ण होने को हिंदी पत्रकारिता के इतिहास का एक गौरवपूर्ण एवं प्रेरणादायी अवसर बताते हुए पत्रकारिता के मूल्यों, निष्पक्षता और सामाजिक उत्तरदायित्व को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।