
बिलासपुर। संवाददाता9 अगस्त 2026, विश्व आदिवासी दिवस एवं मूलनिवासी दिवस के अवसर पर बिलासपुर में इतिहास रचा गया। आदिवासी समाज द्वारा शहर में पहली बार विशाल स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें 70 यूनिट से अधिक रक्तदान हुआ।

रक्तदान के साथ दिया संस्कृति और सेवा का संदेश
आयोजकों ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित यह दिवस केवल उत्सव का नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपराओं, अधिकारों और गौरवशाली पहचान के संरक्षण का दिन है।

इस बार समाज ने नृत्य-संगीत के साथ-साथ मानव सेवा को भी अपनी पहचान बनाया। रक्तदान शिविर इसी सोच का प्रतीक बना।
70 यूनिट रक्तदान, समाज में उत्साह
साईं ब्लड एंड कंपोनेंट सेंटर के सहयोग से लगे इस शिविर में बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं और समाज के प्रबुद्धजन रक्तदान के लिए आगे आए। कुल 70 यूनिट से अधिक रक्त एकत्रित किया गया।
आयोजकों ने इसे समाज के लिए गौरव और उत्साह का विषय बताया। उन्होंने कहा –"यह सिर्फ रक्तदान नहीं है। यह हमारी सामाजिक जिम्मेदारी और मानवता के प्रति समर्पण का प्रमाण है।"
"आदिवासी समाज सेवा में भी अग्रणी"
आयोजकों ने कहा कि आदिवासी समाज को अब केवल पारंपरिक उत्सवों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। रक्तदान जैसे पुनीत कार्यों से हम समाज को सकारात्मक संदेश दे सकते हैं और यह साबित कर सकते हैं कि आदिवासी समाज सामाजिक सरोकारों में भी सबसे आगे है।
उन्होंने कहा – "किसी भी बदलाव के लिए पूरे समाज की भागीदारी जरूरी है। आज की सफलता हर रक्तदाता और कार्यकर्ता की मेहनत का नतीजा है।"
आभार और संकल्प
इस अवसर पर सभी रक्तदाताओं, कार्यकर्ताओं और सहयोगियों के प्रति आभार जताया गया। साथ ही साईं ब्लड एंड कंपोनेंट सेंटर, बिलासपुर की पूरी टीम का विशेष धन्यवाद किया गया जिन्होंने रक्त संग्रहण और व्यवस्था में अहम भूमिका निभाई।
आयोजकों ने संकल्प लिया कि आने वाले वर्षों में रक्तदान की संख्या को और बढ़ाया जाएगा। साथ ही आदिवासी समाज के सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय योगदान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाएगा।
नारा: "सेवा, संस्कृति और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ - आदिवासी समाज निरंतर आगे बढ़े और समाज का नाम दिन-प्रतिदिन ऊंचा करे।"