
बिलासपुर -प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 1 साल तक सोना ना खरीदने की अपील का छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष कमल सोनी ने स्वागत करते हुए इसे व्यापारियों और राष्ट्रहित के बीच एक मजबूत कड़ी बताया है। कमल सोनी ने कहा कि सराफा व्यापारियों को इस अपील से घबराने की आवश्यकता नहीं है। 2 वर्षों से वैश्विक स्तर पर युद्ध और अनिश्चितता के कारण सोने में अत्यधिक तेजी आई है, जिससे सिर्फ बुलियन गोल्ड का लेनदेन हो रहा है, ऐसे निवेश में पहले से ही दो वर्षों में सर्राफा व्यापारी घाटे और व्यापार की कमी से जूझ रहे हैं । आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के अपील हमारे लिए संजीवनी साबित होने जा रही है आने वाले दिनों में व्यापार में बढ़ोतरी आएगी” यह समय सराफा बाजार को ‘सर्विस सेक्टर’ के रूप में विकसित करने का है। इस पहल से देश की मुद्रा को मजबूती मिलेगी, सोने का आयात कम होने से भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बचेगा। “जब हमारा रुपया मजबूत होगा, तो व्यापार के अन्य क्षेत्रों में लागत कम होगी, जिसका सीधा लाभ छोटे और मध्यम व्यापारियों को मिलेगा। यह व्यापारियों का देश के प्रति सबसे बड़ा योगदान होगा।”
. ‘डेड कैपिटल’ बनेगा ‘ग्रोथ इंजन’
प्रदेश अध्यक्ष कमल सोनी ने बताया कि तिजोरियों में बंद सोना अर्थव्यवस्था को गति नहीं देता। “प्रधानमंत्री चाहते हैं कि जनता का पैसा बाजार के सर्कुलेशन में आए। जब पैसा बैंकों और उद्योगों में लगेगा, तो देश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे । छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन पहले भी आम लोगों से अपील कर चुका है की ब्रांडेड और कॉर्पोरेट घराना के भ्रामक प्रचार के आकर्षण में आकर उनसे लेनदेन ना करें, उनसे खरीदारी करने पर बहुत से भारतीय रुपए विदेश में जाते हैं जिसकी वजह से भी हमारा देश की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है।
स्वर्ण शिल्प कला बोर्ड का गठन जरूरी
प्रदेश अध्यक्ष कमल सोनी ने कहा कि पिछले २ वर्षों से हुई वैश्विक उथल पुथल से सराफा बाजार में भी कारोबार की कमी आई है,
तथा आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपील के बाद निश्चित हम आने वाले दिनों इस संकट से बाहर आयेंगे परंतु पिछले २ वर्षों की उठा पटक को देखते हुए आवश्यक हो जाता है कि देश के जिन राज्यों में स्वर्ण कला बोर्ड का गठन नहीं किया गया है वहां जल्द ही गठन किया जाये, जिससे मध्यम और निम्न स्तर के कारीगर और व्यापारियों को प्रत्यक्ष लाभ मिल सके !
छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन भी छत्तीसगढ़ राज्य में पिछले दो वर्षों से स्वर्ण शिल्प कला बोर्ड गठन की मांग कर रहा हैं ।इससे पारंपरिक कला का संरक्षण होगा। बोर्ड के माध्यम से छत्तीसगढ़ की पारंपरिक आभूषण निर्माण कला और पुश्तैनी कारीगरों (सोनी समाज एवं अन्य स्वर्ण शिल्पकारों) को सरकारी संरक्षण मिलेगा। स्थानीय कलाकारों को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण देकर उन्हें ‘मेक इन इंडिया’ के तहत ग्लोबल मार्केट के लिए तैयार किया जाएगा।बोर्ड के गठन से इस क्षेत्र से जुड़े हजारों परिवारों को सीधे सरकारी योजनाओं, रियायती ऋण और बीमा का लाभ मिल सकेगा,और रोजगार सुनिश्चित होगा।