बिलासपुर में आवासीय सहकारी समितियों को मजबूत बनाने मंच की पहल, नए उपविधियों के क्रियान्वयन की मांग

बिलासपुर में हाउसिंग सोसायटियों का बड़ा खुलासा: 90% कॉलोनियां अब तक नहीं हुईं हैंडओवर, कई बिल्डर्स पर गंभीर आरोप

बिलासपुर। शहर की आवासीय कॉलोनियों और अपार्टमेंट्स में रहने वाले हजारों परिवारों की समस्याओं को लेकर बुधवार को बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में पंजीकृत आवासीय सहकारी समिति मंच ने बिल्डर्स, प्रशासन और सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। मंच के संयोजक सुजीत कुमार मित्रा, सह-संयोजक जी. वाय. फड़के, सदस्य पी.सी. दास, राजीव कुमार और अजय बाटवे ने दावा किया कि बिलासपुर की अधिकांश हाउसिंग सोसायटियां आज भी अधिकारों और मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही हैं।

मंच ने आरोप लगाया कि शहर में तेजी से आवासीय प्रकल्प विकसित हुए, लेकिन रहवासियों को न तो पर्याप्त सुविधाएं मिलीं और न ही उन्हें सहकारी समितियों के अधिकारों की जानकारी दी गई। पदाधिकारियों के अनुसार, सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से प्राप्त जानकारियों में कई विसंगतियां सामने आई हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अनेक कॉलोनियों और अपार्टमेंट्स का संचालन नियमों के अनुरूप नहीं हो रहा है।

प्रेसवार्ता में सबसे बड़ा आरोप यह लगाया गया कि वर्ष 2006 से अब तक बिलासपुर के 90 प्रतिशत से अधिक बिल्डर्स ने जानबूझकर अपनी कॉलोनियों और अपार्टमेंट्स का विधिवत हैंडओवर नहीं किया है। संयोजक सुजीत कुमार मित्रा ने कहा कि हैंडओवर नहीं होने के कारण रहवासी अपने परिसरों में मंदिर निर्माण, सोलर सिस्टम या अन्य सामुदायिक विकास कार्य तक नहीं करा पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ बिल्डर्स विभिन्न विभागों में प्रभाव और संपर्कों के बल पर प्रकरणों को वर्षों तक लंबित रखे हुए हैं, जबकि जमीन और फ्लैट बेचने के बाद भी परिसरों पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहते हैं।

मंच ने सहकारिता विभाग के उप पंजीयक चंद्रशेखर जायसवाल की भूमिका पर भी सवाल उठाए। पदाधिकारियों का आरोप है कि शिकायतों के समाधान के बजाय विभागीय स्तर पर बिल्डर्स के पक्ष में झुकाव दिखाई देता है, जिससे रहवासियों की समस्याएं और बढ़ रही हैं। मंच ने मामले की निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। अजय बाटवे ने आरोप लगाया कि कुछ बिल्डर्स बिना फायर सेफ्टी और अन्य अनिवार्य व्यवस्थाएं पूरी किए अधूरी कॉलोनियों को सोसायटी के हवाले करना चाहते हैं। ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज करने और कॉलोनाइजर लाइसेंस निरस्त करने की मांग की गई।

वहीं सदस्य राजीव कुमार ने कहा कि रहवासी हर महीने मेंटेनेंस शुल्क, यूजर चार्ज और विभिन्न करों का भुगतान करते हैं, लेकिन इसके बावजूद साफ-सफाई, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। मंच ने चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो रहवासी व्यापक आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

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