आईपीएस रजनेश सिंह: कर्तव्य की मिसाल, बिलासपुर का अभिमान

1. वर्दी की यात्रा: संघर्ष से शिखर तक
1997 में उप पुलिस अधीक्षक बने। 2012 में भारतीय पुलिस सेवा में चयन। 13 वर्ष की निष्कलंक सेवा के बाद मार्च 2025 में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, बिलासपुर बने। अब पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) के पद पर पदोन्नत। यह सिर्फ पदोन्नति नहीं, जनता के विश्वास की जीत है।

2. अपराध पर निर्णायक प्रहार
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रायपुर, पुलिस अधीक्षक धमतरी, पुलिस अधीक्षक नारायणपुर से लेकर बिलासपुर तक। बस्तर के नक्सल क्षेत्रों में अभियानों का सफल नेतृत्व किया। आतंकवाद निरोधक दस्ता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में भी सेवाएँ दीं। जहाँ गए, अपराध का ग्राफ गिराया।

3. साइबर अपराध के विरुद्ध जन-आंदोलन
केवल कार्रवाई नहीं, जन-जागरूकता को हथियार बनाया। मीडिया, सोशल मीडिया, नुक्कड़ सभाओं और स्कूल-कॉलेजों के माध्यम से घर-घर तक संदेश पहुँचाया: “सावधान रहें, सतर्क रहें”। उनके प्रयासों से हजारों नागरिक साइबर ठगी से बचे। बिलासपुर में साइबर सुरक्षा एक जन-अभियान बन गया चेतना के माध्यम से

4. पूरे समाज को एक सूत्र में पिरोया
बिलासपुर के सभी सामाजिक संगठन, व्यापारी संघ, युवा मंडल, महिला समूह और वरिष्ठ नागरिक समितियों को पुलिस के साथ जोड़ा। थाने को भय का नहीं, समाधान का केंद्र बनाया। “पुलिस आपके द्वार” की भावना को साकार किया।

5. सम्मान और परीक्षा, दोनों में अव्वल
2017 में राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित। 2019 में चुनौतियों का सामना किया, पर सत्य की जीत हुई। आर्थिक अपराध शाखा की क्लोजर रिपोर्ट, विभागीय जाँच समाप्त, और केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के आदेश से गौरवपूर्ण वापसी।

एक पंक्ति में परिचय:
जंगलों में नक्सल से लड़े, शहर में साइबर से लड़े, समाज को जोड़कर विश्वास जीता। वर्दी पर दाग नहीं, राष्ट्रपति पदक सजाया। अब डीआईजी बनकर पूरे संभाग को नई दिशा देंगे।

नारा: “इरादे फौलादी, कार्रवाई तूफानी, आईपीएस रजनेश सिंह — जनता के रखवाले, अपराधियों के काल।”

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