तालियों की गड़गड़ाहट के बीच 8 वर्षीय मयंशी खण्डेलवाल बनीं ‘भारत की नन्हीं कोकिला’, हासिल किया तृतीय स्थान

महज 8 वर्ष की आयु में सुरों का ऐसा जादू, नन्हीं गायिका ने दर्शकों का दिल जीत लिया

बिलासपुर। प्रतिभा आयु की मोहताज नहीं होती, और इसका जीवंत उदाहरण बनीं ‘भारत की नन्हीं कोकिला’ के नाम से पहचान बना रहीं आठ वर्षीय मयंशी खण्डेलवाल

एक प्रतिष्ठित संगीत प्रतियोगिता में मयंशी ने सदाबहार गीत “ओ रंगीले, तूने कैसा जादू किया” की मनमोहक प्रस्तुति देकर श्रोताओं एवं निर्णायकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

अपनी मधुर आवाज, आत्मविश्वासपूर्ण मंच प्रस्तुति और सुरों की सटीक पकड़ से मयंशी ने प्रतियोगिता में तृतीय स्थान प्राप्त कर एक और उपलब्धि अपने नाम की। जैसे ही उनकी प्रस्तुति समाप्त हुई, पूरा सभागार तालियों की गूंज से गूंज उठा और उपस्थित जनों ने उनकी प्रतिभा की मुक्तकंठ से सराहना की।

कम आयु में संगीत के प्रति समर्पण एवं निरंतर अभ्यास ने मयंशी को एक उभरती हुई बाल गायिका के रूप में स्थापित किया है। उनकी इस सफलता ने न केवल परिवार, अपितु संपूर्ण नगर को गौरवान्वित किया है। संगीत प्रेमियों का मानना है कि यदि इसी लगन एवं परिश्रम के साथ मयंशी आगे बढ़ती रहीं, तो आगामी समय में वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पृथक पहचान बनाने में सफल होंगी।

मयंशी की इस उपलब्धि पर परिजनों, शुभचिंतकों एवं संगीत प्रेमियों ने उन्हें बधाई प्रेषित करते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

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